रांची के सौदाग बगीचा टोली गांव की पैरा खिलाड़ी महिमा उरांव राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं। उनके घर में पदक और ट्रॉफियां सजी हैं, लेकिन मकान की टूटी दीवारें और कमजोर छत बरसात के दौरान परिवार की चिंता बढ़ा देती हैं।
महिमा सिटिंग पैरा वॉलीबॉल और सिटिंग पैरा थ्रोबॉल से जुड़ी हैं। अभ्यास के लिए उन्हें गांव से लगभग पांच किलोमीटर पैदल जंगल की पगडंडी से रिंग रोड तक जाना पड़ता है। वहां से ऑटो लेकर वह मोरहाबादी स्थित स्टेडियम पहुंचती हैं और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इसी रास्ते से लौटती हैं।
उनके कमरे में मेडल, ट्रॉफियां और घरेलू सामान एक साथ रखे हैं। सीमित जगह के कारण वहीं लकड़ी के चूल्हे पर भोजन भी बनाया जाता है। महिमा के अनुसार, उन्होंने आवास योजना के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन अब तक घर नहीं मिला। उनका कहना है कि परिवार को उज्ज्वला योजना का लाभ भी नहीं मिल सका है।
राष्ट्रीय स्तर पर महिमा ने सिटिंग पैरा वॉलीबॉल की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। वह अप्रैल 2023 में तमिलनाडु में आयोजित नेशनल फेडरेशन कप और मार्च 2025 की 13वीं नेशनल पैरा वॉलीबॉल चैंपियनशिप में उपविजेता रहीं। फरवरी 2026 में मेरठ में हुई 14वीं राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी उन्होंने उपविजेता स्थान हासिल किया।
सिटिंग पैरा थ्रोबॉल में वह दिसंबर 2022 की पहली राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उपविजेता रहीं और सितंबर 2024 में झारखंड में आयोजित तीसरी राष्ट्रीय चैंपियनशिप की विजेता बनीं। अगस्त 2025 में कोयंबटूर की चौथी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्हें उपविजेता स्थान मिला, जबकि फरवरी 2026 में राजस्थान में आयोजित नेशनल फेडरेशन कप में उन्होंने विजेता का खिताब हासिल किया।
महिमा नेपाल, मलेशिया, भूटान और थाईलैंड के साथ हुई पैरा थ्रोबॉल मैच शृंखलाओं में विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रही हैं। मार्च 2025 में भारत-कंबोडिया प्रथम एशियन पैरा थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी उन्होंने जीत हासिल की। इन उपलब्धियों के बीच उनका कठिन सफर बताता है कि अभ्यास, सुरक्षित आवास और रसोई जैसी मूल सुविधाओं की जरूरत अब भी बनी हुई है।