रांची की प्री-रबी गोष्ठी में नकली बीज और मिलावटी खाद से किसानों की सुरक्षा पर जोर

गढ़खटंगा में आयोजित किसान गोष्ठी में प्राकृतिक खेती, मिट्टी जांच, संतुलित उर्वरक और रबी फसलों के विस्तार पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में करीब 1500 किसान शामिल हुए।

2 मिनट पढ़ें 7 बार पढ़ी गई
रांची के गढ़खटंगा में आयोजित प्री-रबी किसान गोष्ठी में उपस्थित किसान

रांची के गढ़खटंगा स्थित भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में गुरुवार को आयोजित प्री-रबी किसान गोष्ठी में किसानों को नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों से बचाने की जरूरत पर जोर दिया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीक का लाभ देश के सभी किसानों तक पहुंचना चाहिए।

राज्य मंत्री ने किसानों से अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने मिट्टी की जांच और संतुलित मात्रा में उर्वरकों के इस्तेमाल को खेती की लागत घटाने तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया। गोष्ठी में आधुनिक कृषि तकनीक और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने की बात भी रखी गई।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने पूर्वी भारत में कृषि विस्तार की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में रबी फसलों की खेती बढ़ाई जा सकती है। इससे उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग होने के साथ किसानों के लिए आय बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया। उन्होंने एक नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी। अपने संबोधन में उन्होंने झारखंड की जनजातीय परंपराओं में मौजूद प्रकृति, जल और पौधों के संरक्षण संबंधी समझ को आधुनिक कृषि विज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

गोष्ठी में रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ के लगभग 1500 किसानों ने भाग लिया। किसानों के बीच गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के उन्नत बीज के साथ नैनो यूरिया, नैनो डीएपी तथा मिनरल मिक्सचर समेत विभिन्न कृषि सामग्रियों का वितरण किया गया। स्थानीय जलवायु और संसाधनों के अनुरूप फसलों एवं बीजों के चयन पर भी बल दिया गया।

कार्यक्रम में किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी, प्रशिक्षण और नई तकनीक पहुंचाने को खेती की उत्पादकता से जोड़ा गया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी खेत बचाओ अभियान चलाने का आह्वान भी किया। गोष्ठी का मुख्य केंद्र आगामी रबी मौसम की तैयारी, सुरक्षित कृषि सामग्री और उपलब्ध खेतों के अधिक प्रभावी इस्तेमाल पर रहा।