झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक को जिले के सभी थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जांच कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि जिन थानों में कैमरे खराब पाए जाएं, उन्हें तत्काल ठीक कराकर उनका सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए।
यह निर्देश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने फिरोज अंसारी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले की पूर्व सुनवाई में अदालत ने डोरंडा थाना प्रभारी से संबंधित अवधि का सीसीटीवी फुटेज पेश करने को कहा था।
सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी की ओर से बताया गया कि मांगी गई अवधि की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है, क्योंकि थाने का सीसीटीवी खराब था। इस जानकारी पर अदालत ने नाराजगी जताई और रांची एसएसपी को जिले के सभी थानों में कैमरों की मौजूदा स्थिति की जांच कराने को कहा।
अदालत ने थानों में सीसीटीवी कैमरों का चालू रहना जरूरी बताया। उसके अनुसार, इनसे पुलिस की गतिविधियों की निगरानी में मदद मिलती है और आवश्यकता पड़ने पर किसी घटना या मामले की जांच के लिए रिकॉर्डिंग उपलब्ध हो सकती है। निर्देश में खराब कैमरों को बिना देरी दुरुस्त कराने पर जोर दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से अपने बच्चों को पेश कराने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बच्चों को प्राथमिकी दर्ज किए बिना चार दिनों तक हिरासत में रखा गया और हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद उन्हें जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई। ये दावे याचिका में लगाए गए आरोप हैं और मामले पर न्यायिक सुनवाई जारी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद ने पक्ष रखा। डोरंडा थाने की रिकॉर्डिंग इसी मामले की परिस्थितियों की पड़ताल के लिए तलब की गई थी। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को करेगी।