रांची के लालपुर स्थित प्रणामी हाइट्स में चल रहे फिजिक्स वाला कोचिंग संस्थान को सील किए जाने की प्रक्रिया पर झारखंड हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि संबंधित व्यक्ति की ओर से दिए गए जवाब पर विचार किए बिना परिसर को सीधे सील करना प्रशासनिक निष्पक्षता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।
मामला अपर बाजार निवासी और भवन मालिक अभिषेक नरसरिया की याचिका से जुड़ा है। याचिका में रांची नगर निगम के सहायक टाउन प्लानर द्वारा एक जुलाई 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी। नोटिस में किरायेदार कोचिंग संस्थान को सात दिनों के भीतर कथित कमियां दूर करने को कहा गया था और ऐसा नहीं होने पर नगर निगम अधिनियम तथा भवन उपविधि के तहत सीलिंग की चेतावनी दी गई थी।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, नगर निगम ने छह जुलाई को दूसरा नोटिस जारी किया था। उन्होंने दोनों नोटिस के जवाब आठ और नौ जुलाई को लिखित रूप से सौंपे, लेकिन उन पर कोई आदेश पारित किए बिना तीन सितंबर को भवन सील कर दिया गया। उनका पक्ष था कि संस्थान कानून के अनुरूप संचालित हो रहा था और नोटिस में दर्ज कमियां उचित नहीं थीं।
नगर निगम ने सुनवाई में कहा कि याचिकाकर्ता के जवाब संतोषजनक नहीं थे और बताई गई कमियों को दूर नहीं किया गया था। रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत ने पाया कि नोटिस में पांच कमियां दर्ज थीं और भवन मालिक ने उनका जवाब भी दिया था। अदालत के अनुसार, सक्षम अधिकारी को इन जवाबों पर विचार कर स्वीकृति या अस्वीकृति के कारण बताते हुए आदेश देना चाहिए था।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर नगर निगम प्रशासक के समक्ष विस्तृत जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। निगम को जवाब मिलने के बाद याचिकाकर्ता या उनके प्रतिनिधि को सुनवाई का अवसर देने और परिसर की जांच कराने का निर्देश भी मिला है।
अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया के बाद नगर निगम तीन सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार उचित और कारणयुक्त निर्णय ले। आदेश में यह भी रेखांकित किया गया कि कारणयुक्त फैसला नहीं मिलने पर प्रभावित व्यक्ति के लिए आगे उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने का आधार स्पष्ट नहीं हो पाता। इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निष्पादन कर दिया।