रांची में गर्भधारण पूर्व स्वास्थ्य देखभाल पर राज्यस्तरीय मंथन, मौजूदा कार्यक्रमों से जोड़ने पर जोर

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के लिए रांची में हुई बैठक में पोषण, एनीमिया की रोकथाम, समय पर जांच और निरंतर परामर्श को प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई।

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रांची में बुधवार को आयोजित राज्यस्तरीय परामर्श बैठक में गर्भधारण से पहले की स्वास्थ्य देखभाल को झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट और राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हुई बैठक का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों की समय रहते पहचान और रोकथाम के उपायों पर विचार करना था।

बैठक में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों, सरकारी अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान कहा गया कि गर्भावस्था और प्रसव से जुड़े कई जोखिम गर्भधारण से काफी पहले विकसित होने लगते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा गर्भावस्था की अवधि तक सीमित रखने के बजाय पहले से तैयारी पर भी केंद्रित होना चाहिए।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बैठक में बताया गया कि झारखंड की करीब 29.2 प्रतिशत महिलाएं कम वजन की हैं, जबकि 16.9 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन की श्रेणी में हैं। साथ ही, 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की करीब 28 प्रतिशत महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हुआ था और 11.7 प्रतिशत किशोरियां गर्भवती हैं या मां बन चुकी हैं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने किशोरावस्था से ही पोषण, एनीमिया की रोकथाम, मानसिक एवं प्रजनन स्वास्थ्य तथा स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां और बच्चे की बुनियाद गर्भावस्था शुरू होने से पहले ही तैयार होती है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने जागरूकता के साथ समय पर जांच, उचित उपचार, नियमित परामर्श और फॉलोअप को जरूरी बताया। बैठक में किशोर-किशोरियों और योग्य दंपतियों तक स्वास्थ्य सेवाएं समय पर पहुंचाने, पोषण सुधारने, बीमारियों की रोकथाम और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार हुआ।

प्रतिभागियों ने दूसरे राज्यों में संचालित समुदाय आधारित गर्भधारण पूर्व देखभाल मॉडल की जानकारी भी साझा की। विशेषज्ञों ने ऐसी देखभाल को मौजूदा स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों से जोड़ने तथा झारखंड के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश तैयार करने के संभावित तरीकों पर मंथन किया।