रांची में पांच राज्यों की बैठक, दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण और पुनर्वास पर जोर

रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय बैठक में दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने, संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने और पुनर्वास सुविधाएं बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।

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रांची में दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण और पुनर्वास पर आयोजित क्षेत्रीय बैठक

रांची में मंगलवार को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के गैर-संस्थागत पुनर्वास और दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने के विषय पर पूर्वी क्षेत्र की परामर्श समिति की बैठक हुई। इसमें झारखंड के साथ पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और सिक्किम के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में दत्तक ग्रहण की मौजूदा व्यवस्था, सामाजिक जागरूकता और दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास से जुड़े उपायों पर विचार किया गया।

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावना सक्सेना ने बताया कि दत्तक ग्रहण को लेकर समाज में अब भी कई भ्रांतियां मौजूद हैं। सामान्य बच्चों की तुलना में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को परिवार मिलने में अधिक कठिनाई होती है। उन्होंने इस अंतर को कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाने और राज्य स्तर पर काम कर रही संस्थाओं को सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत बताई।

बैठक में यह भी सामने आया कि दिव्यांग बच्चों को अपनाने के इच्छुक परिवारों और दत्तक ग्रहण के लिए उपलब्ध बच्चों के बीच बड़ा अंतर है। अधिकारियों ने माना कि इस दिशा में कई एजेंसियां काम कर रही हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे। व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाने के लिए दत्तक ग्रहण के पूरे तंत्र में आवश्यक बदलाव पर जोर दिया गया।

झारखंड के समाज कल्याण विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने राज्य में दत्तक ग्रहण की स्थिति को असंतोषजनक बताते हुए कहा कि अभी व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों का अलग कैडर विकसित करने और व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत रेखांकित की।

बैठक में बताया गया कि दिव्यांग बच्चों के लिए रिनपास में अलग वार्ड बनाने की तैयारी भी की जा रही है। इसका उद्देश्य विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए उपयुक्त देखभाल और पुनर्वास व्यवस्था विकसित करना है। राज्य निःशक्तता आयुक्त कीर्तिश्री ने भी दत्तक ग्रहण के इच्छुक लोगों और उपलब्ध बच्चों के बीच मौजूद अंतर की ओर ध्यान दिलाया।

कार्यक्रम की शुरुआत में चाइल्ड प्रोटेक्शन सोसाइटी के सदस्य सचिव विजय सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत किया। पांच राज्यों के प्रतिनिधियों की भागीदारी वाली इस बैठक में संस्थागत देखभाल के विकल्प के रूप में पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने, संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने और दिव्यांग बच्चों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को अधिक संवेदनशील बनाने पर केंद्रित चर्चा हुई।