रांची में बारिश और जलजमाव के बीच लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ी है। शहर के रानी हॉस्पिटल की चिकित्सक एवं निदेशक डॉ. सोनी सिन्हा के अनुसार, इस वर्ष जुलाई से 29 अगस्त तक अस्पताल के इंडोर और आउटडोर विभाग में 130 मरीजों में संक्रमण की पहचान कर उनका इलाज किया गया।
लेप्टोस्पायरोसिस को आम बोलचाल में चूहा बुखार भी कहा जाता है। डॉ. सिन्हा ने बताया कि यह संक्रमण मुख्य रूप से चूहों और कुछ अन्य जीवों के मल-मूत्र से फैल सकता है। संक्रमित जीवों के पेशाब से लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया पानी या मिट्टी में पहुंच सकता है और उसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति के संक्रमित होने का जोखिम बढ़ जाता है।
बारिश के मौसम में दूषित पानी और जलजमाव से संपर्क की आशंका अधिक रहती है। चिकित्सक के मुताबिक, नंगे पैर चलने या दूषित पानी में लंबे समय तक रहने से संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है। शरीर पर मौजूद कट या घाव भी दूषित पानी के संपर्क में आ सकते हैं।
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश कुमार सिंह के अनुसार, अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी और आंखों में लालिमा इसके संभावित लक्षण हैं। शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं। गंभीर संक्रमण में किडनी और लिवर प्रभावित होने तथा अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ने की बात भी उन्होंने कही।
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने अस्पताल में इस संक्रमण के इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध होने का दावा किया है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक बुखार लेप्टोस्पायरोसिस नहीं होता। दूषित पानी के संपर्क के बाद बुखार या शरीर में तेज दर्द होने पर चिकित्सक को पानी के संपर्क की जानकारी देना उपयोगी हो सकता है।
बचाव के लिए जलजमाव और गंदे पानी से अनावश्यक संपर्क न करने की सलाह दी गई है। जरूरत पड़ने पर रबर के जूते, चप्पल और दस्ताने इस्तेमाल करने, कट या घाव ढककर रखने तथा दूषित पानी के संपर्क के बाद त्वचा को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोने को कहा गया है। आवासीय स्थानों से चूहों को दूर रखने पर भी जोर दिया गया है।