रांची में 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयुष निदेशालय और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वानिकी संकाय में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” विषय पर हुए आयोजन में आयुर्वेद आधारित जीवनशैली, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और औषधीय पौधों के संरक्षण पर जोर दिया गया।
आयुष निदेशक दिनेश कुमार यादव ने आयुर्वेद को उपचार के साथ संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और मानसिक शांति से जुड़ी समग्र चिकित्सा पद्धति बताया। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान, तनाव और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के बीच आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
कार्यक्रम में ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक आयुष पद्धति का लाभ पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। यादव ने इन इलाकों में कार्यरत आयुष कर्मियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए स्वास्थ्य परामर्श, योग, औषधीय पौधों और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित जानकारी स्थानीय लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता रेखांकित की।
आयुष निदेशक ने विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों और सामुदायिक स्तर पर आयुर्वेद एवं योग से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। उन्होंने आयुष पदाधिकारियों और कर्मियों से संवेदनशीलता तथा समर्पण के साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की अपील भी की। कार्यक्रम में शिवजी वर्मा और उप निदेशक आयुर्वेद डॉ. कृष्ण कुमार ने स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के विभिन्न उपायों की जानकारी साझा की।
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वानिकी संकाय में आयोजित कार्यक्रम का केंद्र आयुर्वेद में प्रयुक्त औषधीय पौधे रहे। पशु चिकित्सा संकाय के डीन डॉ. आलोक कुमार पांडेय ने औषधीय पौधों को प्राकृतिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उनके संरक्षण की जरूरत पर बल दिया।
वानिकी संकाय के डीन डॉ. कौशल कुमार ने औषधीय पौधों की प्रजातियों और आयुर्वेद में उनके चिकित्सकीय उपयोग की जानकारी दी। कार्यक्रम में डॉ. देवव्रत प्रधान, डॉ. अभय कुमार, डॉ. ताहिरा तथा शोधार्थी अमित कुमार और बलराम ने भी दैनिक जीवन एवं स्वास्थ्य सुरक्षा में औषधीय पौधों की उपयोगिता पर अपने विचार रखे।