लोहरदगा सदर अस्पताल का आईसीयू निष्क्रिय, गंभीर मरीजों को रिम्स रेफर करने की मजबूरी

कोविड काल में मिले वेंटिलेटर और निगरानी उपकरण नियमित उपयोग में नहीं आ रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा प्रशिक्षित कर्मियों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को रांची भेजना पड़ता है।

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लोहरदगा सदर अस्पताल में निष्क्रिय आईसीयू और उपलब्ध चिकित्सा उपकरण

लोहरदगा सदर अस्पताल में कोविड काल के दौरान तैयार किया गया आईसीयू नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा है। गंभीर और अति गंभीर मरीजों के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उपचार व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें रांची के रिम्स रेफर करना पड़ता है। अस्पताल का आईसीयू कक्ष बंद रहने से उपलब्ध मशीनों का भी समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।

अस्पताल के आउटडोर विभाग में प्रतिदिन करीब 500 से 600 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, जबकि इंडोर विभाग में औसतन 100 मरीज भर्ती रहते हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, हर दिन औसतन छह गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल भेजा जाता है। इनमें ऐसे मरीज भी होते हैं जिन्हें लगातार निगरानी और जीवनरक्षक उपचार की आवश्यकता होती है।

कोविड काल में सदर अस्पताल को 12 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इनमें से लगभग आधे बाद में वापस ले लिए गए। अस्पताल में बचे वेंटिलेटर, हृदय संबंधी निगरानी उपकरण और दूसरी जरूरी मशीनें नियमित उपयोग में नहीं हैं। लंबे समय तक उपकरणों के निष्क्रिय रहने से उनके खराब होने की आशंका भी जताई गई है।

आईसीयू चलाने के लिए केवल मशीनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। इसके नियमित संचालन के लिए गंभीर रोगों के उपचार में दक्ष चिकित्सक, फिजिशियन, प्रशिक्षित नर्सिंगकर्मी और क्रिटिकल केयर तकनीशियन चाहिए। सदर अस्पताल में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ की नियमित सेवा और आवश्यक संख्या में तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं होने से मौजूदा संसाधनों का अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है।

स्थानीय स्तर पर आईसीयू शुरू करने की मांग पहले भी स्वास्थ्य विभाग के सामने रखी गई है। खासकर हार्ट अटैक और अन्य गंभीर मामलों में मरीजों को रांची ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी स्थिति में उपचार के साथ यात्रा का अतिरिक्त दबाव भी जुड़ जाता है और लोहरदगा में सक्षम क्रिटिकल केयर सुविधा की जरूरत सामने आती है।

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शंकर प्रसाद के अनुसार, अस्पताल में आईसीयू की आवश्यकता है, लेकिन जगह और संसाधनों की कमी इसके संचालन में बड़ी बाधा है। उनका कहना है कि सुविधा को बेहतर तरीके से विकसित किया जाए तो गंभीर मरीजों को लोहरदगा में ही उपचार मिल सकता है। फिलहाल विशेषज्ञ मानव संसाधन और जरूरी आधारभूत व्यवस्था की कमी दूर किए बिना आईसीयू का नियमित संचालन संभव नहीं हो पा रहा है।