रांची में SIR और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजद-आप का प्रदर्शन

राजद और आम आदमी पार्टी ने रांची में अलग-अलग प्रदर्शन कर मतदाता सूची पुनरीक्षण, निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर अपनी मांगें उठाईं।

2 मिनट पढ़ें 6 बार पढ़ी गई
रांची में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करते राजनीतिक कार्यकर्ता

रांची में रविवार को राष्ट्रीय जनता दल और आम आदमी पार्टी ने मतदाता सूची तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अलग-अलग विरोध कार्यक्रम आयोजित किए। दोनों दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन व्यवस्था में पारदर्शिता और शिकायतों पर सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की।

राजद की रांची जिला इकाई ने धुर्वा में प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण त्रुटिपूर्ण तरीके से हो रहा है। प्रदर्शन में खनिज कानून और जनगणना प्रपत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कॉलम नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया।

राजद के प्रदेश महासचिव कैलाश यादव और रांची जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र महतो ने इन विषयों पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली का विरोध किया। कैलाश यादव ने दावा किया कि नए एमएमडीआर कानून से झारखंड को सालाना 13 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा और इसका प्रभाव राज्य की कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है। यह आंकड़ा और संभावित प्रभाव पार्टी नेता का दावा है।

राजद नेताओं ने SIR के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की। जिला इकाई ने इन्हीं मांगों को लेकर आठ अक्टूबर को मशाल जुलूस निकालने का निर्णय भी लिया है।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी की रांची इकाई ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से फिरायालाल चौक तक शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला। पार्टी के प्रदेश सचिव प्रीतम मिश्रा ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के साथ चुनाव संबंधी निर्णयों में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग रखी।

आप नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितताओं और शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा निर्वाचन आयोग को गंभीर सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। दोनों प्रदर्शनों में लगाए गए आरोप संबंधित राजनीतिक दलों के वक्तव्य हैं; उपलब्ध विवरण में निर्वाचन आयोग या केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।