रांची और हटिया से देश के कई प्रमुख शहरों के लिए प्रतिदिन सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रियों को अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है। सूरत, इंदौर, मुंबई और बेंगलुरु जाने वालों के सामने सीमित सेवाओं तथा लंबी प्रतीक्षा सूची जैसी मुश्किलें हैं। कई यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए पहले बस या निजी वाहन से दूसरे शहर अथवा स्टेशन तक पहुंचना पड़ता है।
सूरत के लिए रांची से मालदा-सूरत एक्सप्रेस सप्ताह में केवल एक दिन चलती है। शेष दिनों में यात्रियों को जमशेदपुर जाकर वहां से ट्रेन पकड़नी पड़ती है। इंदौर के लिए भी रांची से सीधी सेवा उपलब्ध नहीं बताई गई है। इस मार्ग के यात्री पतरातू पहुंचकर धनबाद-भोपाल एक्सप्रेस या सप्ताह में एक दिन चलने वाली धनबाद-शिप्रा एक्सप्रेस का सहारा लेते हैं।
मुंबई के लिए रांची से बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को ट्रेन मिलती है। इसके अतिरिक्त गया-एलटीटी ट्रेन सप्ताह में एक दिन रांची होकर गुजरती है। इस सीमित उपलब्धता के कारण यात्रियों के पास यात्रा की तारीख चुनने के विकल्प कम रह जाते हैं।
बेंगलुरु के लिए हटिया से भी रोज सीधी ट्रेन नहीं है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, एसएमवीटी बेंगलुरु सुपरफास्ट एक्सप्रेस मंगलवार और रविवार को तथा एक अन्य हटिया-बेंगलुरु एक्सप्रेस शनिवार को चलती है। सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को रांची या हटिया से बेंगलुरु की सीधी सेवा उपलब्ध नहीं रहती।
दक्षिण भारत जाने वालों में आईटी पेशेवर, विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और इलाज के लिए जाने वाले मरीज शामिल हैं। प्रकाशित अनुमान के मुताबिक रांची से रोज करीब तीन हजार यात्री दक्षिण भारत की यात्रा करते हैं। सीमित ट्रेनों के कारण टिकटों पर लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ता है।
रांची रेल मंडल ने वेल्लोर होकर बेंगलुरु के लिए अतिरिक्त ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे मुख्यालय को भेजा है। डीआरएम करुणानिधि सिंह के अनुसार प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और स्वीकृति मिलने पर दक्षिण भारत की यात्रा आसान हो सकती है। रांची के सांसद संजय सेठ ने भी यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त ट्रेन का प्रस्ताव रेलवे के समक्ष रखे जाने की जानकारी दी है।