रांची जिले के रातू क्षेत्र स्थित तिगरा में करीब 2.75 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल और सड़क की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्माण पूरा हुए लगभग दो महीने ही हुए हैं, लेकिन पहली बरसात के बाद पुल की दीवारों में कई जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं। सड़क के कुछ हिस्से भी कीचड़ में बदल गए हैं।
यह निर्माण ग्रामीण विकास कार्य विभाग की ओर से कराया गया है। स्थानीय लोगों ने काम की गुणवत्ता और मजबूती की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान तय मानकों की अनदेखी हुई और पुराने पुल को तोड़ने पर निकले पत्थरों का इस्तेमाल नए ढांचे में किया गया। इन आरोपों की किसी विभागीय जांच से पुष्टि होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों ने पुल के दोनों ओर बने कम ऊंचाई वाले डिवाइडर पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो गई है और भारी वाहनों की आवाजाही के समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। निर्माण सामग्री आसपास के खेतों में गिरने से किसानों को परेशानी होने की बात भी कही गई है।
तिगरा का यह पुल स्थानीय आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया है। यह मार्ग बेड़ो, नगड़ी, इटकी, बाजपुर, सिमलिया और बिजुलिया के साथ एनएच-75 की ओर संपर्क उपलब्ध कराता है। रोजाना ग्रामीण और किसान इस रास्ते का उपयोग करते हैं तथा कृषि उत्पाद भी इसी मार्ग से बाजारों तक पहुंचाए जाते हैं।
पंचायत के मुखिया सुखदेव उरांव के अनुसार, निर्माण की गुणवत्ता को लेकर संवेदक और विभागीय अभियंता से कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की दीवारों में इतनी जल्दी दरारें आने से उसकी मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं और समय रहते जांच तथा मरम्मत जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने पूरे काम की निष्पक्ष तकनीकी जांच, पुल और सड़क की तत्काल मरम्मत तथा संभावित अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग रखी है। उपलब्ध विवरण में विभाग, अभियंता या संवेदक की ओर से इन शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।