रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज की व्यवस्था सुधारने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल करने से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने शनिवार को सुनवाई की। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की जानकारी मांगी है।
अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें 30 जुलाई 2026 को दिए गए आदेश के पालन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। न्यायालय ने शपथपत्र की प्रति मामले के न्याय मित्र और संबंधित अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराने को कहा है।
इस मामले में अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। तब तक राज्य सरकार को रिम्स की स्वास्थ्य व्यवस्था से संबंधित पूर्व आदेश पर उठाए गए कदमों का विवरण अदालत के समक्ष रखना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
हाईकोर्ट ने रिम्स की शासी परिषद को सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अमरेश्वर सहाय की अनुपस्थिति में भी नियमित बैठकें आयोजित करने की अनुमति दी है। अदालत को बताया गया कि जस्टिस सहाय ने 28 जुलाई को पत्र भेजकर परिषद की बैठकों में शामिल होने में असमर्थता जताई थी।
खंडपीठ ने पत्र में बताए गए कारणों को स्वीकार करते हुए जस्टिस सहाय को शासी परिषद की बैठकों में शामिल होने की बाध्यता से मुक्त कर दिया। इसके बाद परिषद उनकी मौजूदगी के बिना प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर बैठक कर सकेगी।
रिम्स की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर ज्योति शर्मा ने एक जनहित याचिका दायर की थी। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने भी संस्थान में मरीजों के इलाज की स्थिति का स्वतः संज्ञान लेकर उसे जनहित याचिका में बदल दिया था। अदालत फिलहाल दोनों याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई कर रही है।