रांची स्थित उच्च शिक्षा निदेशालय ने झारखंड के राजकीय विश्वविद्यालयों और उनके अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत कुछ शिक्षकों के वित्तीय लाभ से जुड़ी जानकारी तलब की है। मांगा गया ब्योरा उन शिक्षकों से संबंधित है, जिनका पीएचडी पंजीकरण पूर्वव्यापी यानी रेट्रोस्पेक्टिव आधार पर हुआ था और जिन्होंने पीएचडी या एमफिल की उपाधि के कारण छठे पुनरीक्षित वेतनमान में लाभ प्राप्त किया।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधीन निदेशालय ने इस संबंध में राज्य के आठ राजकीय विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को पत्र भेजा है। विश्वविद्यालयों को संबंधित शिक्षकों की सूची अविलंब उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। निदेशालय ने अभी सूची सौंपने की कोई अंतिम तारीख नहीं बताई है।
यह जानकारी रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और कोल्हान विश्वविद्यालय से मांगी गई है। बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय और झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय भी पत्र पाने वाले संस्थानों में शामिल हैं।
निदेशालय ने विशेष रूप से ऐसे मामलों का विवरण देने को कहा है, जिनमें रेट्रोस्पेक्टिव पीएचडी पंजीकरण को आधार बनाकर वित्तीय लाभ स्वीकृत किया गया। इस दायरे में राजकीय विश्वविद्यालयों के साथ उनके अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक भी आते हैं।
उच्च शिक्षा निदेशालय की उप निदेशक डॉ. विभा पांडेय की ओर से जारी पत्र में डॉ. अजीत कुमार कर्णवाल के 13 अक्तूबर 2026 के आवेदन का संदर्भ भी दिया गया है। उपलब्ध विवरण में आवेदन की विषयवस्तु या उसके आधार पर उठाए गए अन्य बिंदुओं की जानकारी नहीं दी गई है।
विश्वविद्यालयों से सूची प्राप्त होने के बाद निदेशालय इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। फिलहाल किसी शिक्षक के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने या वित्तीय लाभ की वसूली का निर्णय सामने नहीं आया है। मौजूदा निर्देश का केंद्र संबंधित शिक्षकों और उन्हें मिले लाभ का संस्थानवार ब्योरा जुटाना है।