वित्त रहित स्कूलों के अनुदान की समीक्षा में खामियां, जैक से जवाब मांगने की अनुशंसा

विभागीय समिति की समीक्षा में कई वित्त रहित माध्यमिक विद्यालय निर्धारित शर्तों पर खरे नहीं उतरे। समिति ने अनुदान रोकने और स्थापना अनुमति की प्रक्रिया पर जैक से जवाब मांगने की अनुशंसा की है।

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रांची में वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों के अनुदान आवेदनों की समीक्षा

रांची में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अनुदान समिति ने वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों के आवेदनों की समीक्षा के दौरान कई कमियां दर्ज की हैं। इसके बाद समिति ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल से जवाब मांगने की अनुशंसा की है। मामला उन विद्यालयों से जुड़ा है, जिन्हें स्थापना की अनुमति मिली थी, लेकिन अनुदान की जांच में वे निर्धारित मानकों को पूरा करते नहीं पाए गए।

विभागीय सचिव उमाशंकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनुदान से वंचित विद्यालयों की अपील पर विचार किया गया। कुल 107 माध्यमिक विद्यालयों ने विभाग के समक्ष अनुदान के लिए आवेदन किया था। समीक्षा के बाद नियमों और आवश्यक शर्तों का पालन नहीं करने वाले विद्यालयों के आवेदन खारिज कर दिए गए।

जांच में कुछ विद्यालयों में विधिवत शासी निकाय नहीं होने और कहीं निर्धारित संख्या के अनुरूप कक्षाएं उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके बावजूद इन संस्थानों को पहले स्थापना अनुमति मिलने पर सवाल उठे हैं। कुछ विद्यालय स्थापना अनुमति मिलने के कई वर्ष बाद भी स्थायी प्रस्वीकृति हासिल नहीं कर सके, क्योंकि वे मान्यता की जरूरी शर्तें पूरी नहीं कर रहे थे।

दुमका के विजय राय जनजाति माध्यमिक विद्यालय के संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट में केवल छह वर्गकक्ष उपलब्ध होने का उल्लेख किया गया। इसे निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं माना गया। एक अन्य विद्यालय के निरीक्षण में नामांकन की तुलना में विद्यार्थियों की उपस्थिति काफी कम मिली और रिपोर्ट में नामांकन के आंकड़ों पर भी सवाल दर्ज किए गए।

सरायकेला-खरसावां के शास्त्री स्मारक हाई स्कूल के शासी निकाय का गठन भी नियमानुसार नहीं पाया गया। व्यवस्था के अनुसार जैक पहले विद्यालय को स्थापना अनुमति देता है। जरूरी शर्तें पूरी होने पर स्थायी प्रस्वीकृति दी जाती है और पात्र विद्यालयों को राज्य सरकार से अनुदान मिलता है।

समिति ने कहा है कि स्थापना अनुमति देने की प्रक्रिया में अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार पदाधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए। विभाग अब जैक की भूमिका की जांच और आगे की कार्रवाई की दिशा में बढ़ रहा है। फिलहाल समीक्षा में अपात्र पाए गए विद्यालयों को अनुदान देने से इनकार किया गया है।