लोहरदगा के पूजा पंडालों के लिए अग्नि सुरक्षा निर्देश जारी, 100 मीटर तक आतिशबाजी पर रोक

दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अग्निशमन विभाग ने पंडाल निर्माण, बिजली व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण और आपात निकास से जुड़े मानक बताए हैं।

2 मिनट पढ़ें 5 बार पढ़ी गई
झारखंड24 का पूर्ण लोगो—प्रकाशक की लोगो-मात्र छवि के स्थान पर

लोहरदगा में दुर्गा पूजा के दौरान आग से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अग्निशमन विभाग ने पूजा पंडालों के आयोजकों को सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। गुरुवार को चलाए गए जागरूकता अभियान में पंडाल समितियों के सदस्यों को आग से बचाव के उपाय समझाए गए। विभाग ने कहा है कि निर्धारित प्रावधानों की अनदेखी से दुर्घटना होने पर संबंधित आयोजक जिम्मेदार होंगे।

प्रभारी अग्निशमन पदाधिकारी रामाधार मुंडा ने पंडाल निर्माण में प्रयुक्त कपड़ों को अग्निरोधी घोल से उपचारित करने के बाद ही लगाने का निर्देश दिया। प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते रखने को कहा गया है। प्रतिमा के आसपास रूई, फोम और थर्माकोल के इस्तेमाल पर रोक रहेगी, जबकि अगरबत्ती और धूप जलाने के लिए सुरक्षित स्थान तय करना होगा।

बिजली की व्यवस्था के लिए भी सावधानियां बताई गई हैं। तारों को कारपेट के नीचे नहीं बिछाने, हर जोड़ पर ठीक से टेप लगाने और उपकरणों पर पड़ने वाले विद्युत भार का ध्यान रखने का निर्देश है। आयोजन स्थल तक पहुंचने वाला रास्ता खुला रखना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर दमकल और अन्य आपात सेवाएं बिना बाधा पंडाल तक पहुंच सकें।

विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक पंडाल में नौ लीटर क्षमता के चार वाटर-सीओटू, चार किलोग्राम क्षमता के चार एबीसी और चार किलोग्राम क्षमता के दो सीओटू अग्निशामक यंत्र रखने होंगे। इसके अतिरिक्त बालू और पानी से भरी छह फायर बाल्टियां तथा अलग-अलग जगहों पर 500-500 लीटर पानी की व्यवस्था करने को कहा गया है।

पंडाल के प्रवेश और निकास द्वारों के पास अग्निशमन विभाग तथा डायल-112 के आपात संपर्क प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। आयोजकों को ऐसी टीम भी बनानी होगी, जिसके सदस्य आपात स्थिति संभालने और अग्निशमन उपकरण चलाने में प्रशिक्षित या दक्ष हों। इसका उद्देश्य किसी घटना के समय शुरुआती प्रतिक्रिया को व्यवस्थित बनाना है।

अग्निशमन विभाग ने पूजा पंडाल के 100 मीटर के दायरे में आतिशबाजी प्रतिबंधित की है। जागरूकता अभियान के दौरान अग्निक जितेंद्र कुमार पांडेय और विभिन्न पंडालों के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। जारी मानकों में सजावट से लेकर बिजली, पानी, निकास और प्रशिक्षित दल तक सुरक्षा की अलग-अलग जरूरतों को शामिल किया गया है।