झारखंड हाईकोर्ट ने लोहरदगा सदर अस्पताल में लगभग दस वर्षों से अस्थायी रूप से कार्यरत एम्बुलेंस चालक और नाइट वॉचमैन को राहत दी है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने उनकी रिट याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित प्राधिकार को नियमितीकरण से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई 12 सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया।
मामला उन कर्मचारियों से संबंधित है जो लंबे समय से सदर अस्पताल में एम्बुलेंस चालक और रात्रि प्रहरी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि लगातार सेवा देने के बावजूद उनकी नियुक्ति अस्थायी ही बनी रही। इसी बीच उन्हें मौजूदा कार्य व्यवस्था से हटाकर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से काम कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
कर्मचारियों ने अदालत से अपनी लंबी और निरंतर सेवा अवधि को देखते हुए नियमितीकरण पर विचार करने का आग्रह किया था। उनकी दूसरी प्रमुख मांग थी कि उन्हें इच्छा के विरुद्ध किसी आउटसोर्सिंग एजेंसी के अधीन काम करने के लिए बाध्य न किया जाए। याचिका में सेवा की मौजूदा स्थिति और प्रस्तावित आउटसोर्सिंग व्यवस्था, दोनों मुद्दे उठाए गए थे।
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान भी हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को अंतरिम संरक्षण दिया था। अदालत ने संबंधित विभाग और प्राधिकार को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ताओं पर आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिये काम करने का दबाव नहीं बनाया जाए। इससे विस्तृत सुनवाई और अंतिम निर्देश आने तक उनकी कार्य स्थिति को लेकर तत्काल राहत मिली थी।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने याचिका मंजूर कर ली। अदालत का निर्देश संबंधित प्राधिकार को निर्धारित अवधि में नियमितीकरण संबंधी प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी देता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी के अधीन सेवा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन, अभिजीत इंद्र गुरु और अभिषेक कुमार ने पक्ष रखा। उन्होंने कर्मचारियों की करीब एक दशक की सेवा तथा आउटसोर्सिंग से जुड़ी आपत्तियों को अदालत के सामने रखा। अब संबंधित प्राधिकार को हाईकोर्ट की तय 12 सप्ताह की समयसीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।