सरकारी नौकरी के बजाय आधुनिक खेती चुनी, सिमडेगा के हरीश प्रधान कमा रहे 40-45 हजार रुपये महीना

पाकरटांड़ के सोगड़ा गांव निवासी हरीश प्रधान ने छह एकड़ जमीन पर ड्रिप सिंचाई और वैज्ञानिक तरीकों से सब्जियों व जरबेरा फूल की खेती विकसित की है।

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सिमडेगा के सोगड़ा गांव में आधुनिक तरीके से खेती करने वाले हरीश प्रधान

सिमडेगा जिले के पाकरटांड़ प्रखंड स्थित सोगड़ा गांव के हरीश प्रधान ने सरकारी नौकरी के बजाय आधुनिक खेती को अपना करियर बनाया है। वनस्पति विज्ञान में एमएससी करने के बाद उनका चयन झारखंड सहायक पुलिस के पद पर हुआ था, लेकिन उन्होंने गांव लौटकर अपनी छह एकड़ जमीन पर खेती करने का निर्णय लिया।

हरीश ने खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने टमाटर, मिर्च, फूलगोभी, कद्दू और मड़ुआ के साथ जरबेरा फूल की खेती शुरू की। जरबेरा को उन्होंने बाजार में बेहतर कीमत मिलने वाली फसल के रूप में अपने खेतों में जगह दी।

खेती में पानी के बेहतर उपयोग के लिए उन्होंने राज्य सरकार की योजना का सहारा लिया। जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित आरकेवीवाई-पीडीएमसी योजना के तहत उनके खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई गई। इस व्यवस्था से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचने लगा, जिससे पानी की बचत के साथ पैदावार बढ़ाने में भी मदद मिली।

उन्होंने उद्यान विभाग से प्लास्टिक मल्चिंग और संरक्षित फूलों की खेती का प्रशिक्षण भी लिया। प्राप्त तकनीकी जानकारी को खेत में लागू करते हुए उन्होंने सब्जियों और फूलों की खेती को व्यवस्थित ढंग से विकसित किया। आधुनिक सिंचाई, प्रशिक्षण और फसलों के चयन ने उनके कृषि कार्य को आय के नियमित साधन में बदलने में भूमिका निभाई।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरीश अब खेती से हर महीने करीब 40 से 45 हजार रुपये कमा रहे हैं। आधुनिक कृषि में किए गए उनके कार्य के लिए उन्हें रांची में आयोजित कृषि व्यापार मेले में सम्मानित भी किया जा चुका है।

हरीश का अनुभव दिखाता है कि वैज्ञानिक सलाह, उपयुक्त तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी के साथ गांव में उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। उनका मानना है कि आधुनिक तरीके अपनाकर खेती से आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ना संभव है।