रांची में वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह से मुलाकात कर अनुदानित शिक्षण संस्थानों से जुड़े तीन मुद्दे उठाए। वार्ता में करीब 1500 से अधिक संस्थानों के लिए 75 प्रतिशत बढ़ी अनुदान राशि, छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ और पहले से स्वीकृत लंबित राशि के हस्तांतरण पर चर्चा हुई।
मोर्चा के अनुसार, वित्त और विधि विभाग की सहमति के बाद भी अनुदान वृद्धि का प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए नहीं रखा गया था। यह विषय विधानसभा में भी उठा था और सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बढ़ी राशि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। राशि जारी करने से पहले संस्थानों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की जांच की जानी है।
प्रतिनिधियों ने बताया कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने 9 मार्च और 16 अगस्त 2026 को जिला शिक्षा पदाधिकारियों तथा झारखंड एकेडमिक काउंसिल को जांच रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया था। उनका कहना है कि कुछ जिलों को छोड़कर अधिकांश स्थानों से रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है, जिससे भुगतान प्रक्रिया में देरी की आशंका बनी हुई है।
बातचीत के दौरान शिक्षा सचिव ने सरकार के विधानसभा में दिए आश्वासन से पीछे नहीं हटने की बात कही। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन जिलों से जांच प्रतिवेदन नहीं आया है, वहां से रिपोर्ट तत्काल मंगाकर 75 प्रतिशत बढ़े अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि उपलब्ध विवरण में भुगतान की निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।
प्रतिनिधिमंडल ने अनुदानित संस्थानों की छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना से जोड़ने की मांग भी दोहराई। सचिव ने बताया कि मामला कुछ नीतिगत कारणों से लंबित है और इसके समाधान के लिए कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने छात्राओं को योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया।
मोर्चा ने अपीलीय आवेदन के आधार पर स्वीकृत अनुदान राशि का मुद्दा भी रखा। प्रतिनिधियों के मुताबिक, यह राशि 12 अक्टूबर को जिला शिक्षा पदाधिकारियों के पास भेजी गई थी और 15 अक्टूबर तक संस्थानों के खातों में हस्तांतरण का निर्देश था। हजारीबाग, सिमडेगा, गुमला, रामगढ़, धनबाद और पूर्वी सिंहभूम के अतिरिक्त अन्य जिलों में हस्तांतरण की जानकारी नहीं मिलने पर सचिव ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।