विश्व रेबीज दिवस: झारखंड के 49 नगर निकायों में केवल 12 डॉग शेल्टर और 11 कैचिंग वाहन

झारखंड में हर महीने औसतन करीब नौ हजार डॉग बाइट के मामले सामने आने के बीच नगर निकायों में शेल्टर, पिंजरे और डॉग कैचिंग वाहनों की उपलब्धता सीमित बताई गई है।

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रांची में सड़क पर मौजूद आवारा कुत्ते और सीमित डॉग शेल्टर व्यवस्था

विश्व रेबीज दिवस पर झारखंड में आवारा कुत्तों के प्रबंधन और डॉग बाइट से बचाव की व्यवस्था से जुड़े चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, राज्य के 49 नगर निकायों में कुल 12 डॉग शेल्टर होम और 11 डॉग कैचिंग वाहन हैं। कुत्तों को रखने के लिए केवल 50 पिंजरों की उपलब्धता बताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में हर महीने औसतन करीब नौ हजार लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं। वर्ष 2019 से 2025 के बीच 74,315 कुत्तों का टीकाकरण किया गया। नगर विकास विभाग ने 58 डॉग कैचिंग वाहनों की मांग की है, लेकिन इस दिशा में अब तक प्रगति नहीं होने की बात कही गई है।

रांची में स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बताई गई है। शहर में करीब 47 हजार आवारा कुत्ते होने का अनुमान है, जबकि चुटिया स्थित डॉग हॉस्पिटल में केवल 15 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है। राजधानी में प्रतिदिन लगभग 60 से 70 लोगों के डॉग बाइट से प्रभावित होने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है।

नगर विकास विभाग ने रांची नगर निगम को डॉग शेल्टर होम के लिए 2.10 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। बड़गाईं में इसके लिए दो एकड़ जमीन चिह्नित की गई है और इसी महीने निविदा की प्रक्रिया प्रस्तावित है। हालांकि, चिह्नित स्थान पर स्थानीय विरोध की बात भी सामने आई है।

जमशेदपुर में हर महीने औसतन 1,800 और धनबाद में करीब 2,100 डॉग बाइट के मामले होने की जानकारी दी गई है। जमशेदपुर में शेल्टर की योजना तैयार है, लेकिन धन उपलब्ध नहीं हुआ है। धनबाद के तेतुलमारी में कम क्षमता वाला शेल्टर है, जबकि कुसुम विहार में जमीन चिह्नित होने और दो करोड़ रुपये मिलने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है।

नगर विकास विभाग के सचिव सुनील कुमार के अनुसार, निकायों को कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए धन दिया गया है और उनसे अब तक हुए कार्यों की रिपोर्ट मांगी गई है। विभाग इसकी समीक्षा करेगा तथा जिन निकायों में शेल्टर के लिए जमीन चिह्नित नहीं हुई है, वहां प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।