जामताड़ा में 108 एंबुलेंस की बदहाली, नौ वाहन ही नियमित सेवा में होने का दावा

जामताड़ा में कई 108 एंबुलेंस मरम्मत और रखरखाव की कमी से जूझ रही हैं। कर्मचारी संघ के अनुसार जिले में करीब नौ वाहन ही नियमित सेवा दे पा रहे हैं।

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जामताड़ा जिले की 108 एंबुलेंस सेवा में वाहनों की खराब स्थिति का मामला सामने आया है। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में संचालित कई एंबुलेंस मरम्मत के अभाव में खड़ी हैं, जबकि सेवा में लगी कुछ गाड़ियों में भी तकनीकी समस्याएं बनी हुई हैं। इससे आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

रिपोर्ट में जिले में कुल 14 एंबुलेंस संचालित होने की जानकारी दी गई है। इनमें चार से पांच वाहनों को चलने योग्य नहीं बताया गया है और शेष गाड़ियों में भी अलग-अलग खराबियों का उल्लेख है। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश रवानी के अनुसार, करीब नौ एंबुलेंस ही नियमित रूप से सेवा दे पा रही हैं।

कर्मचारी संघ की ओर से कुछ एंबुलेंस के टायर घिसे होने और किसी भी वाहन में स्टेपनी उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है। एक छह पहियों वाली एंबुलेंस के पीछे सहारा देने वाले पहिये में खराबी की बात भी कही गई है। इसके बावजूद उस वाहन को आपात सेवा में लगाए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।

एंबुलेंस कर्मियों के मुताबिक, जामताड़ा से गंभीर मरीजों को धनबाद, दुर्गापुर और दूसरे बड़े अस्पतालों में भेजा जाता है। लंबी दूरी के ऐसे सफर में टायर पंचर होने या वाहन के रास्ते में खराब होने पर मरीज और उनके परिजनों को वैकल्पिक व्यवस्था मिलने तक परेशानी हो सकती है। चालकों को भी खराब वाहनों के साथ सेवा जारी रखने में जोखिम उठाना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, 108 एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली सम्मान फाउंडेशन का करार करीब चार महीने पहले समाप्त हो चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि इसके बाद वाहनों की मरम्मत और रखरखाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। छोटी खराबियों की भी अनदेखी होने से सेवा में लगे वाहनों की दशा लगातार बिगड़ने का दावा किया गया है।

सिविल सर्जन डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि वाहनों की छोटी खराबियों की जानकारी मंगाई गई है। उसके आधार पर अनुमान तैयार कर मरम्मत की मांग मुख्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने सेवा संचालित करने वाली कंपनी को भी छोटी खराबियां दूर कराने के लिए पत्र लिखने की बात कही है।