रांची में झारखंड हाई कोर्ट ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी नागेंद्र नाथ परिहारी की समीक्षा याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस एमएस सोकन और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने पाया कि याचिका 555 दिनों की देरी से दाखिल की गई, लेकिन इस विलंब के लिए पर्याप्त कारण नहीं बताया गया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उनसे कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली। अदालत के समक्ष इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि कथित नियुक्तियों की जानकारी याचिकाकर्ता को कब मिली थी। खंडपीठ ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर देरी माफ करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया।
मामले का न्यायिक क्रम जनवरी 2024 में एकल पीठ के आदेश से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आठ जनवरी 2024 के उस आदेश के विरुद्ध अपील दाखिल की थी। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 23 अप्रैल 2024 को वह अपील खारिज कर दी थी।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त 2024 को एसएलपी खारिज कर दी। इसके करीब 16 महीने बाद, 17 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल की गई थी।
सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने अदालत को बताया कि पहले चयन जिला स्तर पर किया जाता था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अदालत ने चयन की उस पद्धति को निरस्त कर दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस निर्णय को बरकरार रखा था।
खंडपीठ के निर्णय में याचिका दाखिल करने में हुई लंबी देरी और नियुक्ति संबंधी दावे के समर्थन में प्रमाण का अभाव प्रमुख आधार रहे। समीक्षा की मांग खारिज होने के साथ पहले दिए गए आदेश में बदलाव का याचिकाकर्ता का अनुरोध स्वीकार नहीं हुआ।