धनबाद में निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली के विरोध में उपायुक्त कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। विधायक ने सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति के साथ निजी स्कूलों में आरटीई के तहत होने वाले दाखिलों में अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
विधायक का आरोप है कि जिले में शिक्षकों के स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति के दौरान बड़े पैमाने पर रुपये का लेनदेन हुआ। उन्होंने इसकी राशि करीब तीन करोड़ रुपये होने का दावा किया है। उपलब्ध विवरण में इस आरोप की किसी स्वतंत्र जांच या शिक्षा विभाग के जवाब का उल्लेख नहीं है, इसलिए इसे विधायक के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
चटर्जी के अनुसार, उन्होंने अगस्त में जिला शिक्षा अधीक्षक शालिनी डुंगडुंग से मुलाकात कर आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला। मांगी गई सूचनाओं में पिछले एक वर्ष के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के अंतर-जिला स्थानांतरण, नए शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति और स्कूलों के छात्र-शिक्षक अनुपात का ब्योरा शामिल है।
विधायक ने ग्रामीण और शहरी विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई ग्रामीण स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं, जबकि कुछ शहरी स्कूलों में कम विद्यार्थियों के बावजूद अधिक शिक्षक तैनात हैं। उन्होंने ग्रामीण और शहरी विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात समान करने की मांग की है।
आरटीई दाखिलों को लेकर भी विधायक ने जांच की मांग रखी है। उनका आरोप है कि निजी स्कूलों में बीपीएल श्रेणी की सीटों पर प्रवेश के दौरान पात्रता और दूरी के मानकों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने दाखिला सूची की व्यवस्थित जांच कराने तथा कथित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
चटर्जी ने दावा किया कि उन्होंने इस विषय में धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन और शिक्षा सचिव को भी अवगत कराया था, लेकिन ठोस पहल नहीं हुई। भूख हड़ताल के दौरान पूर्व सिंदरी विधायक आनंद महतो भी मौजूद रहे। आंदोलन की प्रमुख मांगों में ग्रामीण स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक देना, स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति का ब्योरा उपलब्ध कराना तथा आरटीई दाखिलों की जांच शामिल है।