जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में डॉ. अमर सिंह ने सोमवार को दोबारा प्राचार्य का पदभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने डॉ. कृष्ण प्यारे से यह जिम्मेदारी संभाली। यह घटनाक्रम उनके जमशेदपुर से टाटा कॉलेज, चाईबासा स्थानांतरण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और उसके बाद दिए गए निर्देश से जुड़ा है।
डॉ. सिंह ने अपने स्थानांतरण के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 25 सितंबर को मामले का निस्तारण करते हुए उन्हें राज्य सरकार के समक्ष नया और ठोस अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता दी थी।
अदालत ने संबंधित प्राधिकारी को अभ्यावेदन मिलने की तारीख से दो सप्ताह के भीतर उचित और अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान डॉ. सिंह की ओर से बताया गया था कि वे दिसंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसी आधार पर उन्हें मूल स्थान पर बने रहने देने का अनुरोध किया गया था।
उनकी ओर से यह पक्ष भी रखा गया कि झारखंड स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार ऐसे स्थानांतरण मामलों पर पुनर्विचार कर सकती है। संबंधित अधिकारियों के समक्ष नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति भी मांगी गई थी।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय के अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि डॉ. सिंह जमशेदपुर में पहले ही चार वर्ष तक सेवा दे चुके हैं, इसलिए उन्हें दोबारा उसी स्थान पर भेजना न्यायसंगत नहीं होगा। राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है, यदि अदालत स्थानांतरण को लेकर सीधे बाध्यकारी आदेश न दे।
दोनों पक्षों की दलीलों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद अदालत ने समयबद्ध निर्णय का निर्देश देते हुए रिट याचिका तथा उससे जुड़े लंबित अंतरिम आवेदनों का निस्तारण कर दिया था। इसी प्रक्रिया के बाद डॉ. अमर सिंह ने जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में प्राचार्य की जिम्मेदारी फिर संभाली है।