गढ़वा जिले के श्रीबंशीधर नगर में सोमवार को चलंत लोक वैन ‘न्याय रथ’ के माध्यम से विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम अनुमंडलीय न्यायालय परिसर, नगर ऊंटारी और कोलझिकी गांव में हुआ। इसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों तक न्याय से जुड़ी जानकारी पहुंचाना तथा उनकी समस्याओं के शीघ्र समाधान में सहायता करना था।
कार्यक्रम के दौरान एलएडीसीएस सदस्य सुधीर तिवारी और स्थायी लोक अदालत के सदस्य मनोज कुमार दुबे ने ग्रामीणों एवं वादकारियों को निःशुल्क कानूनी सहायता के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक अभाव के कारण अधिवक्ता नहीं रख पाने वाले पात्र व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से मुफ्त अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है।
लोगों को बताया गया कि तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले व्यक्ति, महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्य और औद्योगिक दुर्घटनाओं से प्रभावित लोग इस सहायता के पात्र हो सकते हैं। जेल में बंद कैदियों, बाढ़, भूकंप या जातीय हिंसा से प्रभावित लोगों तथा मानसिक और बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों को भी पात्र श्रेणियों में शामिल बताया गया।
पीएलवी कृष्णानंद दुबे ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने ग्रामीणों को 12 सितंबर को प्रस्तावित राष्ट्रीय लोक अदालत सह मेगा अदालत की जानकारी देते हुए सुलह योग्य मामलों के निस्तारण के लिए इस व्यवस्था का उपयोग करने की अपील की। इनमें सुलहनीय आपराधिक मामले, बैंक ऋण, उपभोक्ता विवाद, पारिवारिक विवाद तथा बिजली और वन विभाग से जुड़े मामले शामिल हैं।
कार्यक्रम में बताया गया कि लोक अदालत में मामलों का समाधान पक्षों के बीच सुलह-समझौते के आधार पर किया जाता है। वहां पारित अधिनिर्णय सभी संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होता है। निस्तारण के बाद नियमानुसार कोर्ट फीस लौटाई जाती है, जबकि लोक अदालत के अधिनिर्णय के विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता।
जागरूकता अभियान के दौरान ग्रामीणों और वादकारियों के बीच कानूनी जानकारी वाले पर्चे भी बांटे गए। कार्यक्रम में पीएलवी सदस्यों सहित सैकड़ों ग्रामीण और वादकारी उपस्थित रहे। न्याय रथ के माध्यम से लोगों को उपलब्ध कानूनी सहायता, पात्रता की शर्तों और विवादों के वैकल्पिक निस्तारण की प्रक्रिया एक ही स्थान पर समझाई गई।