रांची के लोक भवन में बुधवार को आदिम डेवलपमेंट सोसायटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के राज्यपाल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने संथाली भाषा की शिक्षा, ओलचिकी लिपि के प्रयोग और विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित मांगों का ज्ञापन सौंपा।
सोसायटी के सचिव बाबुराम सोरेन के नेतृत्व में पहुंचे सदस्यों ने सरकारी विद्यालयों में संथाली भाषा के शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता से संथाली भाषी विद्यार्थियों को मातृभाषा में पढ़ने का अवसर मिल सकेगा।
ज्ञापन में राज्य के सरकारी और निजी विद्यालयों में कक्षा एक से बारहवीं तक संथाली भाषा की पढ़ाई ओलचिकी लिपि में शुरू कराने का विषय भी उठाया गया। संगठन ने इसे भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण से जुड़ा मुद्दा बताया।
प्रतिनिधिमंडल ने संथाली को झारखंड की प्रथम राजभाषा का दर्जा देने की मांग भी रखी। सदस्यों ने इसके समर्थन में राज्य में संथाल समुदाय की आबादी तथा भाषा के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख किया।
बाबुराम सोरेन के अनुसार, राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनीं और उचित कार्रवाई के लिए आवश्यक पहल का आश्वासन दिया। उन्होंने दावा किया कि इन विषयों को मुख्यमंत्री के समक्ष भेजने की बात भी कही गई। इन मांगों पर किसी नीतिगत निर्णय या समयसीमा की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
मुलाकात में सोसायटी के अध्यक्ष विदेश चंद्र सोरेन, सचिव बाबुराम सोरेन, बनमाली हांसदा और सुदन टुडू समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने तीनों मांगों को भाषा की पढ़ाई और संथाली विद्यार्थियों के शैक्षणिक अवसरों से जोड़ते हुए राज्य स्तर पर पहल करने का अनुरोध किया।