देवघर समेत संथाल परगना की रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए जसीडीह, मधुपुर, हंसडीहा और जामा-महारो में चार रेल बाईपास से जुड़ी योजनाएं आगे बढ़ रही हैं। गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के अनुसार, इन परियोजनाओं से कई मार्गों पर ट्रेनों के इंजन को दिशा बदलने की जरूरत कम होगी और यात्रियों का समय बचेगा।
जसीडीह रेल बाईपास का ट्रायल पूरा होने की जानकारी दी गई है और इसके जल्द उद्घाटन की बात कही गई है। देवघर लिंक केबिन से जुड़ा यह नया रेल ट्रैक 4.8 किलोमीटर लंबा बताया गया है। इसके चालू होने पर देवघर, दुमका, गोड्डा और बांका की ओर से हावड़ा, रांची, धनबाद, गिरिडीह तथा कोडरमा जाने वाली ट्रेनों को जसीडीह स्टेशन पर इंजन रिवर्सल से राहत मिलने की उम्मीद है।
मधुपुर रेल बाईपास का काम नवंबर-दिसंबर तक पूरा होने की संभावना जताई गई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 106 करोड़ रुपये की इस योजना में करीब साढ़े सात किलोमीटर नया ट्रैक बिछाया जा रहा है। मधुपुर-गिरिडीह रेल मार्ग पर दो नए स्टेशन भी बनाए जा रहे हैं। इससे गिरिडीह और कोडरमा की दिशा में जाने वाली ट्रेनों का संचालन अधिक सीधा हो सकेगा।
दुमका जिले के हंसडीहा में वाई-सेक्शन वाला रेल बाईपास प्रस्तावित है और इसका टेंडर हो चुका है। हंसडीहा स्टेशन भागलपुर-बांका, दुमका, गोड्डा और जसीडीह-देवघर की दिशाओं को जोड़ता है। यहां बाईपास बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुगम होने तथा इंजन रिवर्सल में लगने वाला समय घटने की बात कही गई है।
जामा-महारो बाईपास से हंसडीहा और बासुकीनाथ के बीच सीधा रेल संपर्क मिलने की उम्मीद है। इसके बाद जसीडीह और गोड्डा की ओर से आने-जाने वाली कुछ ट्रेनों को दुमका स्टेशन ले जाए बिना आगे निकाला जा सकेगा। अभी इस प्रक्रिया में 30 से 45 मिनट तक लगने की जानकारी दी गई है।
सांसद के मुताबिक, हंसडीहा और जामा क्षेत्र की दोनों परियोजनाओं को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। चारों बाईपास अलग-अलग चरणों में हैं, इसलिए इनके संचालन की समयसीमा भी अलग रहेगी। परियोजनाएं पूरी होने पर मुख्य स्टेशनों का दबाव घटने और संथाल परगना से रांची, हावड़ा, भागलपुर तथा अन्य दिशाओं की रेल यात्रा तेज होने की संभावना है।