सरायकेला प्रखंड के मुरुप गांव में 22 अक्टूबर को एकादशी के अवसर पर श्री शुभनाथ (दुर्गा) मंदिर में विशेष पूजा और पारंपरिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। आयोजन की तैयारी में मंदिर समिति और ग्रामीण जुटे हैं। यहां श्रद्धालु दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलकर अपनी आस्था प्रकट करेंगे। मन्नत पूरी होने पर महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के कंटीली झाड़ियों पर लेटकर अनुष्ठान करने की भी परंपरा है।
आयोजकों के अनुसार, मुरुप में यह धार्मिक परंपरा वर्ष 1876 से चली आ रही है और अब गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। मां दुर्गा की जीवंत प्रतिमा की पूजा जिउतिया पर्व से शुरू होती है। यह पूजा लगातार 16 दिनों तक चलती है और दशमी के बाद एकादशी को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
मुख्य देहुरी कुथलु प्रधान के मुताबिक, श्रद्धालु स्थानीय जलाशय से जल लेकर दंडी पाठ करते हुए मंदिर पहुंचेंगे। कई परिवार सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना के साथ अपने घरों में भी पूजा कराएंगे। अनुष्ठान में शामिल होने वाले लोग मां का आशीर्वाद लेने और मन्नत पूरी होने पर आभार प्रकट करने मंदिर पहुंचते हैं।
मंदिर परिसर में मां पाऊड़ी के समक्ष करीब 20 फीट लंबा और दो फीट चौड़ा अग्निकुंड तैयार करने की योजना है। अग्निदेव की पूजा के बाद श्रद्धालु अंगारों पर चलकर परंपरा निभाएंगे। स्थानीय बुजुर्ग सीतानाथ प्रधान ने आयोजन से जुड़ी इस व्यवस्था की जानकारी दी है। मंदिर के पुजारी पंडित रामनाथ होता के अनुसार, यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक आस्था से जुड़ा है।
इस आयोजन को देखने के लिए आसपास के गांवों और पड़ोसी जिलों से भी लोगों के पहुंचने की संभावना जताई गई है। अंगारों पर चलने और कंटीली झाड़ियों पर लेटने की परंपरा के कारण मुरुप का यह आयोजन क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखता है। ग्रामीणों के लिए यह केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सामुदायिक और धार्मिक विरासत है।
श्री शुभनाथ समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए युवा स्वयंसेवकों को तैनात करने की तैयारी की है। समिति के आनंद प्रमाणिक के मुताबिक, आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय लोग मिलकर काम कर रहे हैं। पूजा स्थल और अनुष्ठान से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।