सरायकेला-खरसावां जिले में शरद पूर्णिमा और महालक्ष्मी पूजा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। रविवार, 25 अक्टूबर को जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 150 से अधिक स्थानों पर पूजा-अर्चना की जाएगी। सरायकेला, खरसावां और राजनगर समेत विभिन्न इलाकों में पूजा समितियां आयोजन की व्यवस्था पूरी करने में जुटी हैं।
जिले में यह धार्मिक आयोजन तीन दिनों तक चलने वाला है। अलग-अलग क्षेत्रों में बनाए जा रहे पूजा पंडालों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रतिमाओं की सजावट का काम भी जारी है। समितियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन स्थलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाने की जानकारी दी है।
उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, आश्विन पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को दिन में लगभग 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:40 बजे समाप्त होगी। प्रदोष और निशाव्यापिनी पूर्णिमा रविवार को पड़ने के कारण शरद पूर्णिमा, महालक्ष्मी पूजा और कोजागरा पूजन इसी दिन आयोजित किए जाएंगे।
पूजा के लिए सामान्य शुभ समय रविवार शाम 5:35 बजे से रात 9:54 बजे तक बताया गया है। निशीथकालीन पूजन रात 11:04 बजे से 11:55 बजे तक होगा। इसके अतिरिक्त मध्यरात्रि के बाद रात 1:05 बजे से 2:38 बजे तक भी पूजा का समय निर्धारित किया गया है।
स्थानीय बाजारों में महालक्ष्मी की प्रतिमाएं एक हजार से पांच हजार रुपये तक में उपलब्ध हैं। सार्वजनिक पंडालों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने घरों में कांस्य प्रतिमा स्थापित कर या धान की बाली के माध्यम से पारंपरिक विधि से पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं। इससे आयोजन में सार्वजनिक और घरेलू, दोनों प्रकार की पूजा परंपराएं दिखाई देंगी।
पूजा के अगले दिन सोमवार रात विभिन्न समितियों की ओर से भंडारे आयोजित किए जाएंगे और श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरित किया जाएगा। पूजा समितियां पंडाल, प्रतिमा, श्रद्धालुओं की सुविधा और प्रसाद वितरण से जुड़ी तैयारियों को समय पर पूरा करने में लगी हैं।