चाईबासा के सारंडा क्षेत्र में सरकारी योजना से मिला ट्रैक्टर स्थानीय किसानों के लिए साझा कृषि संसाधन और फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की आय का माध्यम बना है। सारंडा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने इसे कस्टम हायरिंग सेंटर से जोड़कर एक महीने में 62 हजार रुपये का कारोबार किया है।
एफपीसी को यह ट्रैक्टर भूमि संरक्षण विभाग की मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना के अंतर्गत मिला था। कंपनी ने इसके उपयोग को केवल अपने सदस्यों तक सीमित नहीं रखा। कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी ट्रैक्टर से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्थानीय किसान भूमि की तैयारी और जुताई जैसे कृषि कार्यों के लिए इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। कृषि कार्य से संबंधित परिवहन में भी ट्रैक्टर की सेवा ली जा रही है। इससे किसानों को जरूरत के समय मशीन उपलब्ध हो रही है और बाहर से अधिक किराये पर संसाधन लेने की मजबूरी कम हुई है।
सामूहिक व्यवस्था के कारण ट्रैक्टर एफपीसी के लिए आय अर्जित करने वाली परिसंपत्ति बन गया है। इसके साथ ही खेती के जरूरी काम तय समय पर पूरे करने में किसानों को सहायता मिल रही है। एक महीने में हुआ 62 हजार रुपये का कारोबार इस साझा मॉडल के आर्थिक उपयोग को दर्शाता है।
उपायुक्त मनीष कुमार ने इस पहल को सरकारी संसाधन के उपयोग का सराहनीय उदाहरण बताया। उनके अनुसार, योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों और समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने सारंडा एफपीसी की उपलब्धि को दूसरे किसान समूहों के लिए प्रेरक बताया है।
उपायुक्त ने योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में जिला प्रशासन की ओर से सहयोग जारी रखने की बात भी कही। सारंडा की यह पहल खेती के लिए मशीन उपलब्ध कराने और किसान समूह की आमदनी बढ़ाने—दोनों जरूरतों को एक साथ पूरा करने वाले सामुदायिक उपयोग का उदाहरण बनी है।