सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड में अति गरीब परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आजीविका समावेशी योजना लागू की गई है। योजना के लिए एक हजार परिवार चुने गए हैं। इसके क्रियान्वयन में पलामू के नौडीहा बाजार और बिश्रामपुर में पहले किए गए काम के अनुभव का उपयोग किया जा रहा है।
योजना को समझने के लिए सिमडेगा की महिलाओं, चेंज मेकर और अन्य सदस्यों की एक टीम पलामू पहुंची है। टीम नौडीहा बाजार और बिश्रामपुर क्षेत्र में उन परिवारों से मिल रही है, जिन्होंने बकरी पालन, सब्जी उत्पादन, दुकान, ठेला और दूसरे छोटे कारोबार अपनाए हैं। प्रतिभागी इन गतिविधियों के संचालन और उनसे आजीविका बढ़ाने के तरीकों की जानकारी ले रहे हैं।
सिमडेगा में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत पात्र परिवारों को कारोबार शुरू करने के लिए पांच हजार से 25 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। छोटे उद्यमों से परिवारों को हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक आमदनी होने की संभावना जताई गई है।
पलामू, पूर्वी सिंहभूम और गोड्डा में वर्ष 2022 में इसी तरह की पहल ‘उपज’ यानी अल्ट्रा पुअर ग्रेजुएशन अप्रोच के नाम से शुरू हुई थी। बाद में इसे आजीविका समावेशी योजना के रूप में आगे बढ़ाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पलामू में इसके वर्तमान स्वरूप से छह प्रखंडों के 3,800 परिवारों को जोड़ा गया है।
पलामू में योजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, उपज कार्यक्रम के दौरान नौडीहा बाजार और बिश्रामपुर के 1,100 अति गरीब परिवार आत्मनिर्भर बने। तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद उस कार्यक्रम का स्वरूप बदला गया। अब उसके अनुभवों को कुरडेग में चुने गए परिवारों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
अध्ययन दल ने पलामू में सिलाई कार्य से जुड़े कोयल अप्रेजल पार्क का भी भ्रमण किया। दौरे में शामिल सदस्यों ने वहां संचालित गतिविधियों और परिवारों के अनुभवों को समझा। इस प्रशिक्षण और प्रत्यक्ष अध्ययन के बाद कुरडेग में चयनित परिवारों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप छोटे आजीविका साधनों से जोड़ने पर काम किया जाएगा।