सिमडेगा में इस सीजन रूबेला का पहला मामला, स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी

ठेठईटांगर प्रखंड की 10 वर्षीय बच्ची में रूबेला संक्रमण की पुष्टि के बाद राज्यस्तरीय वॉर रूम बनाया गया है। प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय मरीज खोज और टीकाकरण की निगरानी की जा रही है।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
सिमडेगा के ठेठईटांगर में रूबेला का मामला मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाई

सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड में 10 वर्षीय बच्ची रूबेला से संक्रमित पाई गई है। इस सीजन में झारखंड में सामने आया यह रूबेला का पहला मामला बताया गया है। मुंडाटोली निवासी बच्ची के रक्त नमूने की जांच के बाद रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने संक्रमण की पुष्टि की है।

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और नियंत्रण की कार्रवाई तेज कर दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड में राज्यस्तरीय वॉर रूम बनाया गया है। राज्य में मिजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है और इसकी सूक्ष्म स्तर पर निगरानी की जा रही है।

ठेठईटांगर में सक्रिय मामलों की खोज जारी है। स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों को प्रभावित क्षेत्र में मरीजों की सूची अद्यतन रखने का निर्देश दिया गया है। सिमडेगा के सिविल सर्जन ने ठेठईटांगर रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को नियंत्रण संबंधी उपाय सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में खसरे के 15 मरीज भी मिले हैं। ये मामले पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे पूर्वी सिंहभूम और पाकुड़ समेत करीब चार जिलों में सामने आए हैं। राज्य टीकाकरण पदाधिकारी विजय किशोर रजक ने बताया कि कुछ जिलों में खसरे का प्रकोप मिला था और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है।

रूबेला को जर्मन खसरा भी कहा जाता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली श्वसन बूंदों से फैल सकता है। हल्का बुखार, सिरदर्द, आंखों में लालिमा और शरीर पर गुलाबी चकत्ते इसके प्रमुख लक्षण बताए गए हैं। रूबेला और खसरा अलग-अलग वायरल बीमारियां हैं, हालांकि दोनों के लिए संयुक्त एमआर टीका लगाया जाता है।

रूबेला सामान्यतः हल्की बीमारी हो सकती है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए इसका जोखिम अधिक बताया गया है, क्योंकि संक्रमण गर्भस्थ शिशु तक पहुंच सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार समय पर टीकाकरण इसका प्रभावी बचाव है। संक्रमित व्यक्ति को विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं से अलग रखने, स्वच्छता बरतने और चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता बताई गई है।