सीएमपीएफओ के डीएचएफएल निवेश में 727.67 करोड़ के नुकसान पर सीबीआई ने दर्ज की प्राथमिकी

झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई की रांची भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने सीएमपीएफओ के डीएचएफएल निवेश से जुड़े वित्तीय नुकसान की जांच शुरू की है।

2 मिनट पढ़ें 6 बार पढ़ी गई
रांची में सीएमपीएफओ निवेश मामले की जांच से संबंधित सांकेतिक दृश्य

रांची में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) के निवेश से जुड़े 727.67 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय नुकसान के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई। जांच एजेंसी अब निवेश संबंधी फैसलों और उन्हें लेने की प्रक्रिया की पड़ताल करेगी।

प्राथमिकी में सीएमपीएफओ के तत्कालीन आयुक्त अनिमेष भारती तथा दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के तत्कालीन प्रमोटर और निदेशक कपिल वधावन व धीरज वधावन को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा कुछ अज्ञात अधिकारियों को भी मामले में शामिल किया गया है। आरोपों की पुष्टि अब सीबीआई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

सीबीआई के अनुसार, सीएमपीएफओ ने वर्ष 2015 से 2018 के बीच डीएचएफएल में कुल 1,390.25 करोड़ रुपये लगाए थे। बाद में निवेश की स्थिति और वित्तीय जोखिम को देखते हुए विशेषज्ञों तथा फंड प्रबंधकों ने संगठन को पूरी रकम वापस निकालने की सलाह दी थी। आरोप है कि इस सलाह के बावजूद समय रहते धन निकालने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।

मामला जनहित याचिका के माध्यम से झारखंड हाईकोर्ट के सामने पहुंचा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र जांच को आवश्यक माना। अदालत के समक्ष इस प्रकरण को केवल व्यावसायिक नुकसान या प्रशासनिक चूक बताने वाला हलफनामा भी रखा गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उस दलील को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने मामले में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार की आशंका का उल्लेख करते हुए कहा था कि विभागीय जांच आपराधिक जांच का विकल्प नहीं हो सकती। इसी आदेश के बाद सीबीआई ने नियमित मामला दर्ज किया। प्राथमिकी में साजिश, विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं।

जांच की जिम्मेदारी सीबीआई के डीएसपी कुलदीप को सौंपी गई है। जांच के दौरान डीएचएफएल में निवेश के निर्णय, विशेषज्ञों की चेतावनियों और सीएमपीएफओ प्रबंधन की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी। प्राथमिकी जांच की शुरुआत है और इसमें दर्ज आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।