स्कूल से बाहर बच्चों के सर्वे में लापरवाही, 14 जिलों के अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सर्वे और सत्यापन का काम पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों को 28 सितंबर तक जवाब देने का अंतिम अवसर दिया है।

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रांची में स्कूल से बाहर बच्चों के सर्वे की समीक्षा से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान और उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के कार्यक्रम में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। परिषद ने 14 जिलों के संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 28 सितंबर तक स्पष्टीकरण देने को कहा है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर मामला प्रशासनिक कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा।

राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन की ओर से संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को नोटिस दिया गया है। परिषद ने इससे पहले भी प्रगति की समीक्षा के बाद स्पष्टीकरण मांगा था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, रांची ने समय पर अपना जवाब सौंप दिया, जबकि अन्य संबंधित जिलों से उत्तर नहीं मिला।

जेईपीसी ने दो जुलाई को आदेश जारी कर सात जुलाई से सात सितंबर तक घर-घर और कार्यस्थलों पर सर्वे कराने का निर्देश दिया था। इसके साथ यू-डाइस ड्रॉप बॉक्स में दर्ज बच्चों का सत्यापन भी किया जाना था। काम की धीमी गति को देखते हुए 27 अगस्त को दोबारा जवाब मांगा गया, लेकिन कई जिलों में सर्वे और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

नोटिस में अपर जिला समन्वयकों से यू-डाइस ड्रॉप बॉक्स का सत्यापन नहीं कराने पर भी जवाब मांगा गया है। स्कूल से बाहर बच्चों से संबंधित प्रभारियों को सर्वे की स्थिति और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान में नामांकन की सूची उपलब्ध नहीं कराने के विषय में स्पष्टीकरण देना होगा। जिले से सभी संबंधित अधिकारियों के जवाब एक साथ राज्य मुख्यालय भेजने का निर्देश है।

राज्य स्तर पर 16 सितंबर को हुई समीक्षा में जिलों की प्रगति पर सवाल उठे थे। बैठक, भागीदारी और अभिभावक-शिक्षक बैठकों के आंकड़ों में पूरी प्रगति दिखाई गई, लेकिन वास्तविक नामांकन अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया गया। समीक्षा में यह भी सामने आया कि पहचान के दायरे में आने वाले कई बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं और पहले से चिह्नित बच्चों की स्थिति पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई।

परिषद की कार्रवाई का केंद्र यह सुनिश्चित करना है कि सर्वे केवल अभिलेखों तक सीमित न रहे और चिह्नित बच्चों को वास्तव में शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाए। अब संबंधित जिलों के अधिकारियों को तय समय के भीतर सर्वे, सत्यापन और नामांकन से जुड़ी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। आगे की प्रशासनिक कार्रवाई उनके जवाब और उपलब्ध प्रगति विवरण के आधार पर तय होगी।