हजारीबाग एसपी कार्यालय से करीब 28 करोड़ रुपये की कथित अवैध निकासी के मामले में सीआईडी की विशेष जांच टीम ने रांची स्थित विशेष अदालत के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। जांच एजेंसी ने कार्यालय की लेखा शाखा में मुख्य लेखापाल के रूप में कार्यरत रहे सिपाही शंभू कुमार सिंह पर कंप्यूटर डेटा से छेड़छाड़ कर सरकारी राशि निकालने का आरोप लगाया है।
सीआईडी की ओर से अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, कथित लेन-देन में हजारीबाग एसपी कार्यालय के डीडीओ कोड का उपयोग किया गया। एजेंसी का दावा है कि यह प्रक्रिया करीब दस वर्षों तक चली और बिलों की कागजी प्रतियों तथा कंप्यूटर में रखी गई सॉफ्ट कॉपी के आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर पाया गया।
जांच में शंभू कुमार सिंह के साथ दो अन्य सिपाहियों की भूमिका भी बताई गई है। सीआईडी के मुताबिक, कार्यालय के कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज विवरण बदलकर राशि एक खाते से दूसरे खाते में भेजी जाती थी। ये सभी बातें जांच एजेंसी के निष्कर्ष और अदालत में रखे गए उसके पक्ष पर आधारित हैं।
मामले की शुरुआती जांच में बिहार के गया स्थित एक बैंक शाखा के दो खातों में राशि स्थानांतरित किए जाने की बात सामने आई थी। वित्त विभाग की जांच में इन्हीं दो खातों के जरिये 15.41 करोड़ रुपये से अधिक के कथित गबन का पता चलने का उल्लेख है। संबंधित खातों की निजी जानकारी सार्वजनिक हित में यहां नहीं दी जा रही है।
सीआईडी का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ने पर कुल 21 बैंक खातों के इस्तेमाल की जानकारी मिली। एजेंसी ने इन खातों के माध्यम से करीब 28 करोड़ रुपये की अवैध निकासी किए जाने का आरोप लगाया है। अदालत में साक्ष्य पेश किया जाना जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है; आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
यह प्रकरण जिला कोषागारों से कथित अवैध वेतन निकासी की व्यापक जांच से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सीआईडी की विशेष जांच टीम मामले की पड़ताल कर रही है और उसने संबंधित सिपाही के विरुद्ध जालसाजी तथा राशि निकासी से जुड़े साक्ष्य विशेष अदालत के सामने रखे हैं।