हजारीबाग की सौम्या कुमारी आर्या को पाणिनीय व्याकरण में स्वर्ण पदक

केरेडारी के बेल्टू गांव की सौम्या कुमारी आर्या ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के एमए सत्र 2024-26 में पाणिनीय व्याकरण विषय में स्वर्ण पदक हासिल किया है।

2 मिनट पढ़ें 10 बार पढ़ी गई
हजारीबाग की छात्रा सौम्या कुमारी आर्या को पाणिनीय व्याकरण में मिला स्वर्ण पदक

हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड स्थित बेल्टू गांव की सौम्या कुमारी आर्या ने पाणिनीय व्याकरण की उच्च शिक्षा में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। उन्हें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के एमए सत्र 2024-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए यह सम्मान मिला। राज्यपाल संतोष गंगवार ने सौम्या को पदक और उपाधि प्रदान की।

सौम्या हजारीबाग के नवाबगंज स्थित आर्ष कन्या गुरुकुल की छात्रा रही हैं। उन्होंने वर्ष 2012 में गुरुकुलीय शिक्षा की शुरुआत की थी। इसके बाद झारखंड बोर्ड से मध्यमा और विनोबा भावे विश्वविद्यालय से उप-शास्त्री की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और पाणिनीय व्याकरण को अपना विषय चुना।

पाणिनीय व्याकरण संस्कृत भाषा की संरचना और उसके नियमों के गहन अध्ययन से जुड़ा विषय है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सौम्या ने महर्षि पाणिनि रचित अष्टाध्यायी के 3,975 सूत्रों तथा धातुपाठ की लगभग 2,000 धातुओं का उनकी व्याख्या के साथ अध्ययन किया। इसी अध्ययन के आधार पर उन्हें व्याकरणाचार्य की उपाधि भी मिली है।

आर्ष कन्या गुरुकुल में विद्यार्थियों को वेद, उपनिषद, संस्कृत और विभिन्न शास्त्रों के साथ आधुनिक विषयों की शिक्षा भी दी जाती है। यहां मैट्रिक तक पढ़ाई की व्यवस्था है, जबकि आगे की शिक्षा के लिए विद्यार्थी अलग-अलग महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाते हैं। गुरुकुल का संचालन आचार्य कौटिल्य के निर्देशन में किया जा रहा है।

गुरुकुल के संचालक के अनुसार, मौजूदा समय में पाणिनीय व्याकरण की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या सीमित है। ऐसे में इस विषय में सौम्या की उपलब्धि को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुरुकुल में 300 से अधिक विद्यार्थी शास्त्र और शस्त्र विद्या के साथ अन्य विषयों का अध्ययन कर रहे हैं।

सौम्या के पिता कैटरिंग का काम करते हैं। गुरुकुल से आरंभ हुई उनकी शैक्षणिक यात्रा अब संस्कृत व्याकरण की उच्च शिक्षा तक पहुंची है। स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद वह इसी विषय में आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रही हैं।