हजारीबाग के सीकरी गांव में पैराशूट से गिरा रेडियोसोंडे, पुलिस ने दूर की आशंका

बड़कागांव प्रखंड के सीकरी गांव में मिले कोरिया निर्मित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को पुलिस ने मौसम संबंधी आंकड़े जुटाने वाला रेडियोसोंडे बताया है।

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हजारीबाग के सीकरी गांव में पैराशूट के साथ मिला रेडियोसोंडे उपकरण

हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित सीकरी गांव में पैराशूट से एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण गिरने के बाद ग्रामीणों के बीच पैदा हुई आशंका को पुलिस ने दूर किया है। पुलिस के अनुसार यह मौसम संबंधी सूचनाएं जुटाने वाला रेडियोसोंडे उपकरण है और लोगों को इससे डरने की जरूरत नहीं है।

उपकरण बुधवार देर रात सहदेव राम के घर के पास गिरा था। उससे लाल रंग की डिजिटल रोशनी निकल रही थी और उस पर ‘मेड इन कोरिया’ अंकित था। पैराशूट से जुड़े इस उपकरण को आसमान से नीचे आते देखकर ग्रामीण मौके पर जुट गए। गांव में दो दिनों तक इसकी उत्पत्ति और उपयोग को लेकर चर्चा होती रही।

सूचना मिलने पर सीकरी ओपी प्रभारी रामकुमार राम और अवर निरीक्षक निरंजन प्रकाश पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। पुलिस ने उपकरण को अपने कब्जे में ले लिया। उस पर लगे लेबल के आधार पर इसकी पहचान वेदर्ली कंपनी के डब्ल्यूएचआर-301डी मॉडल वाले रेडियोसोंडे के रूप में हुई। उपकरण पर जनवरी 2026 की तारीख भी दर्ज है।

ओपी प्रभारी ने बताया कि यह कोरिया में बना मौसम संबंधी उपकरण है, जिसका भारत में भी उपयोग किया जा रहा है। पुलिस की ओर से दी गई इस जानकारी के बाद स्पष्ट हुआ कि गांव में गिरा उपकरण किसी विमान का हिस्सा नहीं, बल्कि वायुमंडलीय आंकड़े एकत्र करने के काम आने वाला यंत्र है।

रेडियोसोंडे को सामान्यतः मौसम संबंधी गुब्बारे के साथ ऊंचाई पर भेजा जाता है। इसमें लगे सेंसर तापमान, आर्द्रता, वायुदाब तथा हवा की गति और दिशा से जुड़े आंकड़े जुटाते हैं। ये जानकारियां रेडियो संकेतों के माध्यम से संबंधित केंद्र तक पहुंचती हैं और मौसम पूर्वानुमान तैयार करने में उपयोग की जाती हैं।

ऊंचाई बढ़ने पर कम वायुदाब के कारण मौसम का गुब्बारा फैलता है और एक निश्चित स्तर पर फट सकता है। इसके बाद उससे जुड़ा उपकरण नीचे आने लगता है। सुरक्षित ढंग से जमीन तक पहुंचाने के लिए ऐसे कई उपकरणों में पैराशूट लगाया जाता है। सीकरी में मिले रेडियोसोंडे के नीचे आने की भी यही संभावित प्रक्रिया बताई गई है।