हजारीबाग जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की दिव्यांगता संबंधी प्रारंभिक पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रशस्त ऐप 2.0 के माध्यम से होने वाली स्क्रीनिंग 31 अक्टूबर तक पूरी करने का लक्ष्य है। प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को तय समय-सीमा के भीतर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
अभियान में बच्चों के भीतर 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के संभावित संकेतों की जांच की जाएगी। इनमें दृष्टि, श्रवण और वाणी से जुड़ी परेशानी, चलने-फिरने में कठिनाई, बौद्धिक दिव्यांगता, ऑटिज्म, डिस्लेक्सिया, डिस्कैलकुलिया और सेरेब्रल पाल्सी से संबंधित संकेत शामिल हैं। प्रारंभिक जांच का उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों की समय रहते पहचान करना है।
जिले में शिक्षकों के ऐप से जुड़ने की गति अभी निर्धारित लक्ष्य से पीछे है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल 13,858 शिक्षकों में से 9,379 ने ऐप से जुड़ने की प्रक्रिया पूरी की है। यह 67.67 प्रतिशत है और इस प्रदर्शन के आधार पर हजारीबाग राज्य के 24 जिलों में 18वें स्थान पर है।
राज्य स्तर पर 2,08,159 शिक्षकों में से 1,53,193 शिक्षक ऐप से जुड़कर प्रशिक्षण ले चुके हैं। इनकी हिस्सेदारी करीब 73.59 प्रतिशत है। पश्चिमी सिंहभूम 99.10 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है, जबकि रांची में यह आंकड़ा 56.63 प्रतिशत बताया गया है।
जिला शिक्षा विभाग के अनुसार कुछ निजी, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में पंजीकरण, शिक्षक प्रशिक्षण या बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू नहीं हुई है। विभाग ने स्कूलों को निर्देशों का पालन करने को कहा है। लापरवाही जारी रहने पर संबंधित निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद चिह्नित बच्चों की विस्तृत जांच रिसोर्स शिक्षकों और थेरेपिस्ट के माध्यम से 30 नवंबर तक की जानी है। एक नवंबर से उनका विवरण यू-डायस प्लस 2026-27 में दर्ज करने और शिक्षकों के लिए समावेशी शिक्षा का ऑनलाइन प्रशिक्षण शुरू करने की प्रक्रिया भी निर्धारित है। विभाग का कहना है कि समय पर पहचान जरूरी है, ताकि बच्चे आवश्यक सहायता और सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहें।