हजारीबाग में वन भूमि, सरकारी जमीन और गैरमजरुआ खास किस्म की जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री तथा दाखिल-खारिज से जुड़े मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एसीबी की विशेष छापामारी टीम ने कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
एसीबी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में 68 वर्षीय विशेश्वर प्रजापति, 62 वर्षीय शंकर प्रजापति और 61 वर्षीय रामगति गुप्ता उर्फ रामगति प्रसाद शामिल हैं। तीनों मुफस्सिल थाना क्षेत्र के न्यायखाप टोला, मुकुंदगंज के निवासी बताए गए हैं।
यह कार्रवाई एसीबी के हजारीबाग थाने में 25 सितंबर 2025 को दर्ज कांड संख्या 11/25 के सिलसिले में की गई है। प्राथमिकी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज के उपयोग और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, तत्कालीन अंचलाधिकारी, अंचल निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक और स्थानीय भू-माफिया पर आपसी मिलीभगत का आरोप है। दावा है कि वन भूमि, सरकारी जमीन और गैरमजरुआ खास श्रेणी की जंगल भूमि को कथित रूप से हासिल कर बेचा गया तथा उसका गलत तरीके से दाखिल-खारिज कराया गया।
एसीबी का कहना है कि जांच के दौरान सरकारी अधिकारियों के अलावा जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई। इसी मामले में पहले तत्कालीन अंचलाधिकारी सहित कुछ सरकारी पदाधिकारियों, भू-माफिया, खरीदारों और विक्रेताओं को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
मामले की जांच केवल जमीन के लेन-देन तक सीमित नहीं है। एजेंसी सरकारी अभिलेखों में कथित हेराफेरी और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया की भी पड़ताल कर रही है। ताजा गिरफ्तारियां इसी जारी जांच का हिस्सा हैं; प्रकरण में संबंधित लोगों की भूमिका और आरोपों की वैधानिक स्थिति आगे की जांच तथा न्यायिक कार्यवाही से स्पष्ट होगी।