चौपारण में पूर्व पंचायत सचिव की आईडी से 92 जन्म प्रमाणपत्र जारी, सभी निरस्त

हजारीबाग के सिंघरावां में स्थानांतरण के बाद पूर्व पंचायत सचिव की लॉगिन आईडी से एक दिन में 92 जन्म प्रमाणपत्र जारी होने का मामला सामने आया है। बीडीओ के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
चौपारण की सिंघरावां पंचायत में 92 जन्म प्रमाणपत्र जारी होने के मामले की जांच

हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड की सिंघरावां पंचायत में जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता सामने आई है। पूर्व पंचायत सचिव की लॉगिन आईडी से एक ही दिन में 92 प्रमाणपत्र जारी होने की जानकारी मिलने के बाद प्रखंड प्रशासन ने सभी प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए हैं। बीडीओ के आवेदन पर चौपारण थाने में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंचायत सचिव अनुरागिनी प्रिया का स्थानांतरण चौपारण से डाड़ी प्रखंड हो चुका था। इसके बाद 22 अगस्त को केदार साव को सिंघरावां पंचायत के सचिव का प्रभार दिया गया। नए पंचायत सचिव के लिए जन्म-मृत्यु निबंधन संबंधी लॉगिन आईडी तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान पुराने खाते से प्रमाणपत्र जारी होने का मामला पकड़ में आया।

जिला सांख्यिकी कार्यालय से मिली सूचना के आधार पर प्रखंड प्रशासन ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पूर्व पंचायत सचिव की लॉगिन आईडी के इस्तेमाल के साथ एक प्रज्ञा केंद्र संचालक की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। डिजिटल सिग्नेचर और ओटीपी लेकर प्रमाणपत्र जारी करने का आरोप है, लेकिन इसकी पुष्टि पुलिस और विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह चौपारण बीडीओ नितेश भास्कर के आवेदन पर कांड संख्या 258/26 दर्ज किया गया है। प्रशासन के मुताबिक, यह पता लगाया जा रहा है कि प्रमाणपत्र किन लोगों के नाम पर बने, उनके साथ कौन से आवेदन और दस्तावेज लगाए गए तथा प्रमाणपत्र जारी करते समय किस लॉगिन, डिजिटल हस्ताक्षर और ओटीपी का उपयोग हुआ।

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकृत पंचायत स्तरीय रजिस्ट्रार जन्म और मृत्यु से जुड़ी सूचनाओं का पंजीकरण कर प्रमाणपत्र जारी करता है। सामान्य स्थिति में जन्म के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण का प्रावधान है, जबकि विलंब होने पर निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होती है। प्रशासन का आरोप है कि सिंघरावां में प्रमाणपत्र जारी करते समय इन प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई।

निर्वाचन आयोग के निर्देश पर विशेष गहन पुनरीक्षण का काम चलने के बीच जन्म प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता का प्रश्न भी जांच के दायरे में है। बीडीओ ने पूरे प्रकरण की जांच कराने और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कही है। फिलहाल दर्ज आरोपों में किसी की जिम्मेदारी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है।