रांची में हटिया ग्रिड-1 के 50 एमवीए ट्रांसफॉर्मर नंबर-1 में दोबारा खराबी आने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। ग्रिड से सामान्य दिनों में करीब 125 मेगावाट बिजली मिलती है, जबकि अभी आपूर्ति लगभग 85 मेगावाट बताई गई है। इस तरह राजधानी को करीब 40 मेगावाट कम बिजली मिल रही है।
कम उपलब्धता का असर रातू रोड, पिस्का मोड़, आईटीआई, कांके, बेड़ो, नगड़ी, रिंग रोड, दलादली और लापुंग सहित कई क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इन इलाकों में बिजली कटौती और आपूर्ति बाधित होने की स्थिति बनी हुई है। तापमान बढ़ने के साथ मांग में अचानक हुई वृद्धि ने भी उपलब्ध बिजली पर दबाव बढ़ाया है।
मंगलवार को अरगोड़ा और धुर्वा के 33 केवी सबस्टेशनों में लाइन शिफ्टिंग के लिए शटडाउन लिया गया था। इसके अतिरिक्त कांके ग्रिड से राजभवन 33 केवी पावर सबस्टेशन को मिलने वाली आपूर्ति भी प्रभावित रही। अलग-अलग स्तर पर आई इन बाधाओं के कारण शहर की बिजली व्यवस्था पर एक साथ असर पड़ा।
झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड के अनुसार, ट्रांसफॉर्मर के रखरखाव के दौरान तेज धूप रहने पर राजधानी में बिजली की उपलब्धता 30 से 40 मेगावाट तक घट सकती है। हटिया ग्रिड के चार 50 एमवीए ट्रांसफॉर्मरों से सामान्य रूप से शहर को करीब 120 से 150 मेगावाट बिजली मिलती है। इसलिए एक इकाई बंद रहने से बड़े क्षेत्र की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
हटिया 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन के संबंधित ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत पिछले 10 दिनों से चल रही है। इसमें ऑयल फिल्टरेशन, पीआई वैल्यू में सुधार और हाफ मेन बस की मरम्मत सहित अन्य तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं। इस अवधि में ग्रिड से जुड़े 33 केवी सबस्टेशनों को पूरी क्षमता के अनुसार बिजली नहीं मिल पाएगी।
मरम्मत जारी रहने तक शहर के प्रभावित हिस्सों में आपूर्ति सामान्य बने रहने में कठिनाई हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तापमान और बिजली की मांग बढ़ने पर कमी का असर अधिक इलाकों में महसूस किया जा सकता है। फिलहाल संकट का प्रमुख कारण ग्रिड के एक बड़े ट्रांसफॉर्मर का सेवा से बाहर रहना है।