चुट्टुपालू घाटी में हादसों के बाद एनएचएआई अधिकारियों पर प्राथमिकी, सुरक्षा उपायों की समीक्षा

रामगढ़ की चुट्टुपालू घाटी में लगातार हादसों के बीच एनएचएआई के मैनेजर समेत अन्य के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। कंक्रीट संरचनाएं हटाई जा रही हैं, लेकिन सीसीटीवी अब भी चालू नहीं हैं।

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रामगढ़ की चुट्टुपालू घाटी में सड़क सुरक्षा से जुड़ा सूचना बोर्ड और राजमार्ग

रामगढ़ जिले की चुट्टुपालू घाटी में लगातार सड़क हादसों के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कार्रवाई शुरू हुई है। प्रकाशित विवरण के अनुसार, दो अलग-अलग दुर्घटनाओं में एक-एक व्यक्ति की मौत से जुड़े मामलों में एनएचएआई के मैनेजर समेत अन्य लोगों के खिलाफ रामगढ़ थाने में दो प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं।

रांची-पटना मार्ग के इस घाटी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ाई है। प्रशासन के निर्देश पर सड़क किनारे बनी एक मजबूत कंक्रीट दीवार हटाई गई है और इसी तरह की दूसरी संरचनाओं को भी हटाने का काम चल रहा है। जिले के अधिकारी इन कार्रवाइयों की निगरानी कर रहे हैं।

घाटी के तीखे मोड़ों को सुधारने की योजना भी प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चुट्टुपालू घाटी के दस स्थानों और चरही घाटी के चिह्नित बिंदुओं को दुरुस्त करने के लिए 140 करोड़ रुपये की योजना का टेंडर हो चुका है। हालांकि, इसका काम अभी धरातल पर शुरू नहीं हुआ है।

वाहनों की गति पर नजर रखने के लिए लगाए गए उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे फिलहाल सुचारु रूप से काम नहीं कर रहे हैं। घाटी में निर्धारित 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा के उल्लंघन पर ऑनलाइन जुर्माने के उद्देश्य से ये कैमरे लगाए गए थे। इन्हें पूरी तरह चालू करने में अभी समय लगने की बात सामने आई है।

सड़क पर दोबारा लगाए गए रंबल स्ट्रिप को लेकर भी तकनीकी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में तकनीकी विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि रांची की ओर से आने वाली सीधी ढलान पर बना रंबल स्ट्रिप वाहनों को असंतुलित कर सकता है। इससे पहले इसे हटाया गया था, लेकिन बाद में फिर स्थापित कर दिया गया।

फिलहाल भारी मालवाहक वाहनों के चालकों को सतर्क किया जा रहा है और घाटी में विभिन्न स्थानों पर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार दिनों में किसी बड़ी दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। इसके बावजूद कैमरों, सड़क संरचना और तीखे मोड़ों से जुड़ी लंबित व्यवस्थाएं घाटी की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।