गढ़वा जिले के रमना प्रखंड के चटनिया गांव से बिछड़ी एक बेटी 14 साल बाद अपने परिवार के पास लौट आई। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद 25 सितंबर को उसे देवघर बालिका गृह से परिजनों को सौंपा गया। लंबे समय बाद उसे सामने देखकर परिवार के सदस्य भावुक हो गए। परिजन उसके जीवित होने की उम्मीद छोड़ चुके थे।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मानसिक रूप से अस्वस्थ किशोरी वर्ष 2011 में भटकते हुए पश्चिम बंगाल के हावड़ा पहुंच गई थी। उस समय उसकी उम्र करीब 15 वर्ष थी। हावड़ा बाल कल्याण समिति ने उसे बाल गृह में रखा, जहां लगभग एक वर्ष तक उसकी देखभाल की गई। वह ठीक से बोल नहीं पा रही थी और केवल इतना बता सकी थी कि वह झारखंड की रहने वाली है।
वर्ष 2012 में किशोरी को देवघर स्थित बालिका गृह भेज दिया गया। वहां रहते हुए उसका रांची के रिनपास में नियमित इलाज कराया गया। इसके साथ ही उसे लगातार परामर्श और देखभाल भी मिली। मानसिक स्थिति के कारण शुरुआती वर्षों में उसके परिवार या घर के बारे में ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।
इलाज और परामर्श के बाद उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आया। उसने अपने पिता, जिले और भाई-बहनों से जुड़ी जानकारियां बतानी शुरू कीं। इन्हीं संकेतों के आधार पर बाल कल्याण समिति, देवघर ने रमना थाना और संबंधित क्षेत्र के मुखिया से संपर्क किया। खोजबीन के बाद उसके परिवार का पता लगाया जा सका।
परिवार की ओर से दिए गए दस्तावेजों के मुताबिक महिला की उम्र अब करीब 30 वर्ष है। परिजनों ने बताया कि वर्षों तक कोई सूचना नहीं मिलने के कारण उन्होंने मान लिया था कि उनकी बेटी अब जीवित नहीं है। देवघर में 14 वर्षों से रह रही महिला को औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सुरक्षित रूप से स्वजनों के हवाले किया गया।
इस पुनर्मिलन में बाल कल्याण समिति देवघर, चेतना विकास देवघर, चाइल्ड हेल्पलाइन देवघर तथा रमना थाने के पूर्व और वर्तमान प्रभारियों की भूमिका रही। उपचार, संस्थागत देखभाल और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर की गई संयुक्त तलाश से महिला आखिरकार अपने परिवार तक पहुंच सकी।