धनबाद नगर निगम को अमृत 2.0 मिशन के तहत देश के 75 चयनित शहरी स्थानीय निकायों में जगह मिली है। कार्यक्रम के अंतर्गत शहर में वैज्ञानिक तरीके से भूजल पुनर्भरण बढ़ाने और शहरी बाढ़ का जोखिम कम करने के लिए किए जा रहे उपायों का आकलन किया जाएगा।
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से उथला जलभृत प्रबंधन कार्यक्रम के प्रभावों की लगातार समीक्षा की जा रही है। धनबाद में होने वाला अध्ययन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें पहले किए गए प्रबंधन कार्यों और उनके स्थानीय प्रभावों को समझने पर ध्यान रहेगा।
प्रभाव आकलन की जिम्मेदारी गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर को दी गई है। विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम धनबाद के चयनित स्थलों का भ्रमण करेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टीम में रितेश महाजन और गागरी कोले शामिल हैं।
निरीक्षण के दौरान जलस्रोतों और भूजल रिचार्ज संरचनाओं की स्थिति देखी जाएगी। विशेषज्ञ स्थानीय परिस्थितियों, पानी के उपयोग, भूजल स्तर, पुनर्भरण क्षमता और संबंधित परियोजनाओं के प्रभाव की जानकारी का अध्ययन करेंगे। इसके आधार पर उथले जलभृत प्रबंधन के तहत हुए कार्यों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
पायलट परियोजना के तहत जीवन ज्योति स्कूल बेरा कोलियरी, भगतडीह-एनाकोठी, नीचे मोहल्ला-एनाकोठी और लक्ष्मी कॉलोनी सहित विभिन्न स्थानों पर जांच की गई है। अब स्थल निरीक्षण के जरिए वहां हुए काम और जल प्रबंधन से जुड़े पहलुओं को परखा जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य स्थानीय जलस्रोतों की उपयोगिता, जल संग्रहण और भूजल पुनर्भरण की संभावनाओं को समझना है। अध्ययन में यह भी देखा जाएगा कि इन संसाधनों और संरचनाओं को धनबाद की शहरी जल प्रबंधन व्यवस्था से किस तरह जोड़ा जा सकता है।