आईआईटी आईएसएम धनबाद के टेक्समिन और नीति आयोग में क्रिटिकल मिनरल्स पर समझौता

टेक्समिन और नीति आयोग खनिजों की पहचान से लेकर प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण, तकनीकी विकास और नीतिगत सुझावों तक विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।

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धनबाद में क्रिटिकल मिनरल्स पर टेक्समिन और नीति आयोग के समझौते से संबंधित दृश्य

धनबाद स्थित आईआईटी (आईएसएम) के टेक्समिन और नीति आयोग ने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता शनिवार, 31 अक्टूबर को हुआ। इसका उद्देश्य देश में क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता, खोज और प्रसंस्करण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए अनुसंधान तथा नीतिगत प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ाना है।

समझौते के तहत दोनों संस्थान खनिज संसाधनों की पहचान, उनकी उपलब्धता के आकलन, तकनीकी अनुसंधान और नीतिगत सुझाव तैयार करने में सहयोग करेंगे। खनिजों की खोज से लेकर निष्कर्षण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और पुनर्चक्रण तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर भी काम किया जाएगा।

साझेदारी में खनिज संसाधनों से संबंधित व्यापक डेटाबेस तैयार करने की योजना भी शामिल है। इसके साथ आधुनिक विश्लेषण प्रणाली विकसित करने और तकनीकी अध्ययनों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे संसाधनों के बारे में वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने और उन्हें योजनाओं के निर्माण में उपयोग करने का आधार मजबूत हो सकता है।

इस पहल से केंद्र और राज्य सरकारों को खनिज क्षेत्र से जुड़े नीतिगत निर्णय लेने में तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने की योजना है। वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर नई योजनाएं बनाने और उनके क्रियान्वयन को अधिक व्यावहारिक तथा परिणाम-केंद्रित करने में भी यह सहयोग उपयोगी हो सकता है।

इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग होता है। ऐसे खनिजों के लिए बाहरी निर्भरता घटाना देश की रणनीतिक आवश्यकताओं में शामिल है। यह समझौता राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के उद्देश्यों, खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रयासों को तकनीकी आधार देने की दिशा में उठाया गया कदम है।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर स्थापित टेक्समिन खनन और खनिज क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीकी नवाचार तथा नई तकनीकों को औद्योगिक उपयोग तक पहुंचाने पर काम करता है। नीति आयोग के साथ हुए इस सहयोग में वैज्ञानिक अनुसंधान और सरकारी नीति-निर्माण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर रहेगा।