धनबाद स्थित आईआईटी-आईएसएम में दामोदर वैली कॉरपोरेशन के 22 अधिकारियों को आधुनिक परियोजना प्रबंधन और परियोजना वित्त का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य बिजली परियोजनाओं की योजना, संसाधन आवंटन और प्रगति की निगरानी में तकनीकी साधनों का बेहतर उपयोग करना है।
प्रशिक्षण में अधिकारियों को माइक्रोसॉफ्ट प्रोजेक्ट जैसे सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रोजेक्ट शेड्यूलिंग, संसाधनों के आवंटन और निगरानी की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। इसकी मदद से परियोजना के अलग-अलग चरणों में लगने वाले समय, इस्तेमाल हो रहे संसाधनों और संभावित बाधाओं की पहचान की जा सकती है।
कार्यक्रम में बताया गया कि बड़ी बिजली परियोजनाओं का शुरुआती निर्माण चरण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। जमीन अधिग्रहण, खुदाई और आरंभिक सिविल निर्माण में होने वाली देरी आगे की पूरी कार्ययोजना को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी से संभावित विलंब का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।
डीवीसी के डिप्टी जनरल मैनेजर (इलेक्ट्रिकल) बसुदेव मंडल के अनुसार, परियोजनाओं को निर्धारित समय पर पूरा करना मौजूदा दौर की बड़ी चुनौती है। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल उपकरणों को समय प्रबंधन बेहतर बनाने में उपयोगी बताया।
आईआईटी-आईएसएम के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शशांक बंसल ने परियोजना प्रबंधन और वित्तीय मूल्यांकन को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया। उनके मुताबिक, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के स्तर पर आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन किया जाता है, जबकि क्रियान्वयन के दौरान शेड्यूलिंग, प्रबंधन और निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रशिक्षण का जोर केवल सैद्धांतिक अध्ययन पर नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर आधारित अभ्यास पर भी है। संस्थान की ओर से यह अपेक्षा जताई गई है कि बिजली क्षेत्र की अन्य कंपनियां भी ऐसे कार्यक्रम अपनाएं, ताकि परियोजनाओं की डिजिटल निगरानी मजबूत हो और उन्हें तय समय-सीमा में पूरा करने के प्रयासों को गति मिले।