आर्म्स एक्ट मामले में अखिलेश सिंह की रिहाई बरकरार, झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की कमी का हवाला देते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया। मामला जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है।

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झारखंड हाईकोर्ट ने आर्म्स एक्ट के एक मामले में अखिलेश सिंह को आरोपों से बरी करने का निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल दोषमुक्ति के विरुद्ध अपील में पर्याप्त आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। यह मामला पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर स्थित सिदगोड़ा थाने से संबंधित है।

अदालत के समक्ष उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपी की कथित स्वीकारोक्ति को साबित नहीं कर सका। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि जिस परिसर से हथियार बरामद करने का पुलिस ने दावा किया था, उस पर आरोपी का नियंत्रण स्थापित नहीं हुआ। इन परिस्थितियों में कथित बरामदगी को आरोपी के खिलाफ विश्वसनीय साक्ष्य नहीं माना गया।

जमशेदपुर के 12वें अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 12 अगस्त 2021 को साक्ष्यों के अभाव में अखिलेश सिंह को बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने निचली अदालत के इसी निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसले में हस्तक्षेप का आधार नहीं पाते हुए अपील नामंजूर कर दी।

पुलिस प्राथमिकी के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2004 की रात साकची थाने में दर्ज एक अन्य मामले में गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान सिदगोड़ा क्षेत्र के एक क्वार्टर में हथियार रखे होने की कथित जानकारी मिली थी। इसके आधार पर पुलिस टीम ने रात करीब तीन बजे क्वार्टर संख्या 59 में छापेमारी की थी।

पुलिस ने उस समय ताला तोड़कर परिसर की तलाशी लेने और बेडरूम के एक रैक से प्लास्टिक में लिपटी नौ एमएम की पिस्तौल बरामद करने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, पिस्तौल की मैगजीन में 12 कारतूस मिले थे। हथियार और कारतूस जब्त करने के बाद सिदगोड़ा थाने में आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

हालांकि, न्यायिक परीक्षण में कथित बयान और बरामदगी के स्थान से आरोपी का संबंध प्रमाणित नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने इन्हीं साक्ष्यगत कमियों को देखते हुए निचली अदालत से मिली रिहाई को कायम रखा। इस आदेश के साथ मामले में राज्य सरकार की अपील का निपटारा हो गया।