इंडिया माइनिंग वीक 2026 का कर्टेन रेजर, लगातार दूसरे साल एक अरब टन पार कोयला उत्पादन

नई दिल्ली में इंडिया माइनिंग वीक 2026 के कर्टेन रेजर में टिकाऊ खनन, तकनीक और निवेश पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बीसीसीएल के सीएमडी ने भी भाग लिया।

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इंडिया माइनिंग वीक 2026 के कर्टेन रेजर में संबोधित करते केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी

धनबाद/नई दिल्ली: नई दिल्ली में बुधवार को इंडिया माइनिंग वीक 2026 के कर्टेन रेजर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में खनन क्षेत्र में तकनीक, पारदर्शी नीति, निवेश और टिकाऊ विकास पर चर्चा की गई। प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी, राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल समेत क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। बीसीसीएल की भागीदारी के कारण यह पहल धनबाद के कोयला उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण है।

कोयला मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 20 मार्च 2026 को एक अरब टन कोयला उत्पादन का स्तर हासिल किया। यह लगातार दूसरा वर्ष था जब देश का उत्पादन इस आंकड़े तक पहुंचा। मंत्रालय ने इसे घरेलू ऊर्जा जरूरतों और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

पीआईबी की 14 जुलाई की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार खान मंत्रालय ने महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की आठवीं खेप शुरू की है। इसमें नौ राज्यों के 20 ब्लॉक शामिल हैं—13 ब्लॉक पहली बार और सात ब्लॉक दूसरे प्रयास में नीलामी के लिए रखे गए हैं। ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए आवश्यक माने जाते हैं। पीआईबी के मीडिया आमंत्रण ने 15 जुलाई की शाम कर्टेन रेजर कार्यक्रम की पुष्टि की थी।

प्रभात खबर के मुताबिक मुख्य इंडिया माइनिंग वीक का आयोजन 15 से 17 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के यशोभूमि में प्रस्तावित है। रिपोर्ट में राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के हवाले से कहा गया है कि नीलाम किए गए 100 से अधिक खनिज ब्लॉक परिचालन में आ चुके हैं और चालू वित्त वर्ष में 36 ब्लॉक शुरू हुए हैं। इन दावों को कार्यक्रम में दिए गए आधिकारिक वक्तव्य के रूप में देखा जाना चाहिए।

बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कंपनी की जिम्मेदार खनन, नई तकनीक और टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। धनबाद की अर्थव्यवस्था में कोयला उद्योग की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए, नवंबर के वैश्विक आयोजन में होने वाली तकनीकी और नीतिगत चर्चाओं का असर स्थानीय खनन संचालन और भविष्य की परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है।


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