झारखंड के शहरी निकायों में मांस कारोबार के लिए एनओसी अनिवार्य

नई नगरपालिका विनियमावली के तहत मांस उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण और बिक्री से जुड़े कारोबारियों को स्थानीय निकाय से एनओसी लेनी होगी।

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रांची से जारी जानकारी के अनुसार, झारखंड के शहरी स्थानीय निकायों में मांस और मांस उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण तथा बिक्री से जुड़े खाद्य कारोबारियों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। नगर विकास एवं आवास विभाग ने आठ सितंबर को झारखंड नगरपालिका विनियमावली, 2026 अधिसूचित की थी, जिसे राजपत्र में प्रकाशित किया जा चुका है।

यह व्यवस्था उन सभी शहरी स्थानीय निकायों में लागू होगी, जहां झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 प्रभावी है। नगर निगम क्षेत्र में नगर आयुक्त और नगर परिषद या नगर पंचायत क्षेत्र में कार्यपालक पदाधिकारी स्थानीय प्राधिकार की भूमिका निभाएंगे। यही प्राधिकार नगर सीमा के भीतर पशु वध और मांस की दुकानों के लिए स्थान निर्धारित करेंगे।

विनियमावली के अनुसार, वधशालाओं को ऐसे मांस बाजार से जोड़ा जाना है जो सब्जी, मछली और अन्य खाद्य बाजारों से अलग हो। स्थान चुनते समय दुर्गंध, धुआं और धूल जैसी समस्याओं से बचाव का भी ध्यान रखा जाएगा। निर्धारित स्थान के बाद बिक्री के उद्देश्य से किसी दूसरी जगह पशु वध की अनुमति नहीं होगी।

गोवंशीय पशुओं के वध पर झारखंड गोवंशीय पशु वध प्रतिषेध अधिनियम, 2005 के तहत लागू रोक पहले की तरह प्रभावी रहेगी। नई विनियमावली कारोबार से संबंधित एनओसी प्रक्रिया और स्थान निर्धारण की व्यवस्था तय करती है।

एनओसी के लिए निर्धारित प्रपत्र में आवेदन के साथ 100 रुपये प्रसंस्करण शुल्क देना होगा। आवेदक को भूमि या किरायानामा संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड, होल्डिंग टैक्स और ठोस कचरा प्रबंधन शुल्क की रसीद, दो तस्वीरें, परिसर का नक्शा तथा ठोस कचरा प्रबंधन योजना भी जमा करनी होगी।

आवेदन मिलने के बाद स्थानीय प्राधिकार का अधिकृत दल प्रस्तावित परिसर का अनिवार्य निरीक्षण करेगा और अपनी अनुशंसा देगा। इसी प्रक्रिया के बाद एनओसी जारी की जाएगी। प्रमाणपत्र संबंधित लाइसेंस की अवधि तक मान्य रहेगा, जबकि लाइसेंस के नवीनीकरण के समय कारोबारी को नया एनओसी लेना होगा।