इटखोरी के मां भद्रकाली मंदिर में 50 तोला सोने के आभूषणों से दैनिक शृंगार

शारदीय नवरात्र के दौरान इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी है। माता का प्रतिदिन करीब 50 तोला सोने के आभूषणों से शृंगार किया जा रहा है।

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इटखोरी के मां भद्रकाली मंदिर में नवरात्र के दौरान सजी माता की प्रतिमा

चतरा जिले के इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। स्थानीय लोगों के साथ झारखंड के विभिन्न जिलों तथा बिहार और पश्चिम बंगाल से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। ब्रह्ममुहूर्त से मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, शंखध्वनि और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा रहा है।

नवरात्र में माता के दैनिक शृंगार की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रतिमा को प्रतिदिन करीब 50 तोला सोने के आभूषणों से सजाया जा रहा है। शृंगार में सोने का मुकुट, हार, कुंडल और नथ शामिल हैं। माता के ऊपर चांदी का बड़ा छत्र भी लगाया गया है।

मंदिर के मुख्य पुजारी नागेश्वर तिवारी के अनुसार, सुबह वैदिक विधि और मंत्रोच्चार के बीच शृंगार संपन्न होता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले सोने के आभूषण श्रद्धालुओं द्वारा समय-समय पर चढ़ाए गए सोने से तैयार कराए गए हैं। इन्हीं आभूषणों का उपयोग माता की प्रतिदिन सज्जा में किया जाता है।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, मंदिर के खजाने में अब तक करीब डेढ़ किलो सोना और 64 किलो चांदी जमा है। प्रबंधन का कहना है कि कीमती धातुओं और उनसे बने आभूषणों का पूरा विवरण समिति के रिकॉर्ड में सुरक्षित रखा गया है।

मंदिर आने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और सामर्थ्य के अनुसार सोने तथा चांदी के गहने अर्पित करते रहे हैं। श्रद्धालुओं में यह मान्यता है कि मां भद्रकाली के समक्ष सच्चे मन से की गई प्रार्थना पूरी होती है। मन्नत पूरी होने या परेशानी दूर होने के बाद भी कई भक्त चढ़ावा अर्पित करते हैं।

नवरात्र शुरू होने के साथ मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु माता के दर्शन और विशेष शृंगार को देखने के लिए कतारों में प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस दौरान मंदिर में परंपरागत पूजा-पद्धति के अनुसार अनुष्ठान जारी हैं।